Passage 145.1
अथ या एता हृदयस्य नाड्यस्ताः पिङ्गलस्याणिम्नस्तिष्ठन्ति शुक्लस्य नीलस्य पीतस्य लोहितस्येत्यसौ वा आदित्यः पिङ्गल एष शुक्ल एष नील एष पीत एष लोहितः ॥ १ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अथ याः एताः हृदयस्य नाड्यः, ताः पिङ्गलस्य अणिम्नः [रसस्य पूर्णाः] तिष्ठन्ति; शुक्लस्य, नीलस्य, पीतस्य, लोहितस्य [रसस्य पूर्णाः तिष्ठन्ति] इति । असौ वै आदित्यः पिङ्गलः [अस्ति]; एषः शुक्लः, एषः नीलः, एषः पीतः, एषः लोहितः [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
हृदय की ये नाड़ियाँ पिङ्गल, शुक्ल, नील, पीत और लोहित रंग के सूक्ष्म तत्त्व से युक्त रहती हैं। वह सूर्य भी पिङ्गल है, शुक्ल है, नील है, पीत है और लोहित है।
English meaning
The channels of the heart are filled with subtle essence colored tawny, white, blue, yellow, and red. That sun, too, is tawny, white, blue, yellow, and red.
व्याख्या
पाँचों रंग दोनों क्रमों में सुरक्षित हैं। अणिमन् सूक्ष्मता या सूक्ष्म सार को सूचित करता है। यह प्राचीन नाड़ी-विज्ञान और ध्यान-विश्वचित्र है, आधुनिक रक्तवाहिनी या तन्त्रिका-विज्ञान का प्रत्यक्ष वर्णन नहीं।
Explanation
All five colors are preserved in both sequences. Aṇiman suggests subtlety or a fine essence. This is ancient channel physiology and contemplative cosmography, not a direct account of modern vascular or neurological science.
संदर्भ
अध्यात्म और सूर्य के बीच सम्बन्ध अब हृदय की नाड़ियों के माध्यम से दिखाया जाता है।
Context
The relation between the person and the sun is now described through the heart’s channels.