Passage 64.1
मद्गुष्टे पादं वक्तेति स ह श्वोभूते गा अभिप्रस्थापयाञ्चकार ता यत्राभिसायं बभूवुस्तत्राग्निमुपसमाधाय गा उपरुध्य समिधमाधाय पश्चादग्नेः प्राङुपोपविवेश ॥ १ ॥
पदच्छेद
अन्वय
[हंसः आह—] मद्गुः ते पादम् वक्ता इति । सः ह श्वोभूते [अहनि] गाः अभिप्रस्थापयाञ्चकार । ताः यत्र अभिसायम् बभूवुः, तत्र अग्निम् उपसमाधाय गाः उपरुध्य समिधम् आधाय अग्नेः पश्चात् प्राङ् उपोपविवेश ।
हिन्दी अर्थ
हंस ने कहा: “मद्गु नाम का जलपक्षी तुम्हें एक पाद बताएगा।” अगले दिन सत्यकाम ने गायों को आगे चलाया। सायंकाल वे जहाँ पहुँचीं, वहाँ उसने अग्नि प्रज्वलित की, गायों को रोककर रखा, समिधा डाली और अग्नि के पश्चिम में पूर्व की ओर मुख करके बैठ गया।
English meaning
The swan said, “A diving waterbird will tell you a quarter.” The next day Satyakāma set the cows moving. Where they reached toward evening, he kindled a fire, secured the cows, placed fuel on the fire, and sat to its west facing east.
व्याख्या
मद्गु जल में गोता लगाने वाले पक्षी का नाम है। किसी आधुनिक प्रजाति को निश्चित करके अनुवाद सीमित नहीं किया गया। कथा का बल अलग जीवों के माध्यम से क्रमिक शिक्षा पर है।
Explanation
Madgu denotes a diving waterbird. No precise modern species is imposed on the term. The narrative emphasizes instruction arriving successively through different living forms.
संदर्भ
चौथे पाद की शिक्षा से पहले वही यात्रा और संध्या की तैयारी दोहराई जाती है।
Context
The journey and evening preparations recur before the fourth quarter’s teaching.