Passage 26.1
उपमन्त्रयते स हिङ्कारो ज्ञपयते स प्रस्तावः स्त्रिया सह शेते स उद्गीथः प्रति स्त्रीं सह शेते स प्रतिहारः कालं गच्छति तन्निधनं पारं गच्छति तन्निधनमेतद्वामदेव्यं मिथुने प्रोतम् ॥ १ ॥
पदच्छेद
अन्वय
उपमन्त्रयते, सः हिङ्कारः [अस्ति] । ज्ञपयते, सः प्रस्तावः [अस्ति] । स्त्रिया सह शेते, सः उद्गीथः [अस्ति] । स्त्रीम् प्रति सह शेते, सः प्रतिहारः [अस्ति] । कालम् गच्छति, तत् निधनम् [अस्ति]; पारम् गच्छति, तत् निधनम् [अस्ति] । एतत् वामदेव्यम् मिथुने प्रोतम् [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
स्त्री को स्नेहपूर्वक आमन्त्रित करना हिङ्कार है; उसे प्रसन्न करना प्रस्ताव है; उसके साथ शय्या पर लेटना उद्गीथ है; उसकी ओर मुख करके साथ लेटना प्रतिहार है; मिलन में समय बिताना निधन है और मिलन की समाप्ति तक पहुँचना भी निधन है। यह वामदेव्य साम युगल-मिलन में गुँथा हुआ है।
English meaning
Inviting a woman affectionately is hiṅkāra; winning her favour is prastāva; lying with her is udgītha; lying together facing her is pratihāra; passing time in union is nidhana, and reaching its completion is also nidhana. This Vāmadevya Sāman is woven into the union of a couple.
व्याख्या
ज्ञपयते और कालं गच्छति प्रसंगानुसार समझे गए हैं; उनके अत्यन्त शाब्दिक अर्थ क्रमशः जताना और समय तक जाना होंगे। मिलन और उसकी समाप्ति दोनों निधन के अन्तर्गत आते हैं।
Explanation
Jñapayate and kālaṃ gacchati are understood contextually rather than as the overly literal “makes known” and “goes to time.” Union and its completion both belong to nidhana.
संदर्भ
वामदेव्य साम को स्त्री-पुरुष के मिलन की क्रमिक अवस्थाओं से जोड़ा गया है। यह प्राचीन अनुष्ठानिक प्रतीक-विधान है।
Context
The Vāmadevya Sāman is correlated with stages of sexual union. This is an ancient ritual system of correspondences.