Passage 147.1
उदशराव आत्मानमवेक्ष्य यदात्मनो न विजानीथस्तन्मे प्रब्रूतमिति तौ होदशरावेऽवेक्षाञ्चक्राते तौ ह प्रजापतिरुवाच किं पश्यथ इति तौ होचतुः सर्वमेवेदमावां भगव आत्मानं पश्याव आ लोमभ्यः आनखेभ्यः प्रतिरूपमिति ॥ १ ॥
पदच्छेद
अन्वय
उदशरावे आत्मानम् अवेक्ष्य यत् आत्मनः न विजानीथः, तत् मे प्रब्रूतम् इति [उवाच] । तौ ह उदशरावे अवेक्षाञ्चक्राते । प्रजापतिः तौ ह उवाच—किम् पश्यथः इति । तौ ह ऊचतुः—भगवः, आवाम् सर्वम् एव इदम् आत्मानम् आ लोमभ्यः आ नखेभ्यः प्रतिरूपम् पश्यावः इति ।
हिन्दी अर्थ
“जल से भरे पात्र में अपने को देखकर, अपने विषय में जो न समझ सको, वह मुझे बताओ।” दोनों ने जल-पात्र में देखा। प्रजापति ने पूछा, “क्या देखते हो?” उन्होंने कहा, “भगवन्, हम अपने पूरे स्वरूप को देखते हैं, बालों से लेकर नखों तक, बिल्कुल वैसा ही प्रतिबिम्ब।”
English meaning
“Look at yourselves in a bowl of water, and tell me what you do not understand about yourselves.” They looked into the bowl. Prajāpati asked, “What do you see?” They answered, “Sir, we see our whole selves, an exact likeness, down to the hairs and nails.”
व्याख्या
बाल और नख दोनों उल्लेखित हैं। प्रतिबिम्ब को ठीक-ठीक देख लेना आत्मा का स्वरूप समझ लेना नहीं है; संवाद दोनों बातों के अन्तर की परीक्षा करता है।
Explanation
Both hairs and nails are named. Accurately seeing a reflection is not the same as understanding the nature of the self; the dialogue tests the difference.
संदर्भ
जल-पात्र में देखने का पहला प्रयोग दृश्य समानता को सामने लाता है।
Context
The first water-bowl experiment brings visible resemblance into focus.