Passage 34.1
त्रयी विद्या हिङ्कारस्त्रय इमे लोकाः स प्रस्तावोऽग्निर्वायुरादित्यः स उद्गीथो नक्षत्राणि वयाꣳसि मरीचयः स प्रतिहारः सर्पा गन्धर्वाः पितरस्तन्निधनमेतत्साम सर्वस्मिन्प्रोतम् ॥ १ ॥
पदच्छेद
अन्वय
त्रयी विद्या हिङ्कारः [अस्ति] । त्रयः इमे लोकाः सः प्रस्तावः [अस्ति] । अग्निः वायुः आदित्यः सः उद्गीथः [अस्ति] । नक्षत्राणि वयांसि मरीचयः सः प्रतिहारः [अस्ति] । सर्पाः गन्धर्वाः पितरः तत् निधनम् [अस्ति] । एतत् साम सर्वस्मिन् प्रोतम् [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
तीनों वेदों की विद्या हिङ्कार है; ये तीन लोक प्रस्ताव हैं; अग्नि, वायु और आदित्य उद्गीथ हैं; नक्षत्र, पक्षी और किरणें प्रतिहार हैं; सर्प, गन्धर्व और पितर निधन हैं। यह साम सबमें गुँथा हुआ है।
English meaning
The threefold Vedic learning is hiṅkāra; these three worlds are prastāva; fire, wind and the sun are udgītha; stars, birds and rays are pratihāra; serpents, Gandharvas and ancestors are nidhana. This Sāman is woven through everything.
व्याख्या
प्रत्येक साम-अंग के साथ तीन सदस्यों का समूह है, कुल पाँच त्रिक। त्रयी विद्या वेदाध्ययन के ऋक्, यजुस् और साम रूपों की पारम्परिक संज्ञा है।
Explanation
Each chant portion has a group of three, giving five triads. The threefold learning is the traditional designation for ṛc, yajus and sāman learning.
संदर्भ
अलग-अलग उपासनाओं के बाद अब पाँच त्रिकों द्वारा साम को समस्त जगत् में गुँथा हुआ बताया जाता है।
Context
After the particular contemplations, five triads present the Sāman as woven through the whole world.