Passage 145.4
अथ यत्रैतदबलिमानं नीतो भवति तमभित आसीना आहुर्जानासि मां जानासि मामिति स यावदस्माच्छरीरादनुत्क्रान्तो भवति तावज्जानाति ॥ ४ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अथ यत्र एतत् अबलिमानम् नीतः भवति, तम् अभितः आसीनाः जानासि माम्, जानासि माम् इति आहुः । सः यावत् अस्मात् शरीरात् अनुत्क्रान्तः भवति, तावत् जानाति ।
हिन्दी अर्थ
जब व्यक्ति ऐसी निर्बल दशा में पहुँच जाता है, तो उसके चारों ओर बैठे लोग पूछते हैं, “क्या तुम मुझे पहचानते हो? क्या तुम मुझे पहचानते हो?” जब तक वह इस शरीर से निकला नहीं है, तब तक वह पहचानता है।
English meaning
When a person has been brought to a state of weakness, those sitting around him ask, “Do you recognize me? Do you recognize me?” As long as he has not departed from this body, he recognizes them.
व्याख्या
अबलिमान निर्बलता की दशा है। पहचान का कथन इस प्राचीन वर्णन का भाग है; अचेत व्यक्ति के जीवित या मृत होने का आधुनिक चिकित्सकीय मानदण्ड नहीं। प्रश्न की पुनरावृत्ति सुरक्षित है।
Explanation
Abalimāna denotes a state of weakness. The claim about recognition belongs to this ancient account and is not a medical test of whether an unresponsive person is alive or dead. The repeated question is retained.
संदर्भ
कथा निद्रा से देहान्त के निकट की निर्बलता और पहचान की ओर मुड़ती है।
Context
The account turns from sleep to weakness near death and recognition of others.