Passage 28.1
अभ्राणि संप्लवन्ते स हिङ्कारो मेघो जायते स प्रस्तावो वर्षति स उद्गीथो विद्योतते स्तनयति स प्रतिहार उद्गृह्णाति तन्निधनमेतद्वैरूपं पर्जन्ये प्रोतम् ॥ १ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अभ्राणि संप्लवन्ते, सः हिङ्कारः [अस्ति] । मेघः जायते, सः प्रस्तावः [अस्ति] । वर्षति, सः उद्गीथः [अस्ति] । विद्योतते स्तनयति, सः प्रतिहारः [अस्ति] । उद्गृह्णाति, तत् निधनम् [अस्ति] । एतत् वैरूपम् पर्जन्ये प्रोतम् [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
बादलों का एकत्र होकर चलना हिङ्कार है; वर्षा-मेघ बनना प्रस्ताव है; वर्षा होना उद्गीथ है; बिजली चमकना और गर्जन होना प्रतिहार है; वर्षा थमना निधन है। यह वैरूप साम पर्जन्य में गुँथा हुआ है।
English meaning
The clouds’ gathering and movement is hiṅkāra; a rain cloud’s formation is prastāva; rainfall is udgītha; lightning and thunder are pratihāra; the cessation of rain is nidhana. This Vairūpa Sāman is woven into Parjanya, the rain-bearing power.
व्याख्या
अभ्र और मेघ के उल्लेख बादलों की गति और वर्षा-मेघ के बन जाने को अलग करते हैं। वैरूप विशेष साम का नाम है।
Explanation
The references to abhra and megha distinguish cloud movement from the formation of the rain-bearing cloud. Vairūpa is the name of a particular chant.
संदर्भ
वैरूप साम का आधार पर्जन्य और वर्षा की प्रक्रिया है।
Context
The Vairūpa Sāman is grounded in the rain-bearing power and the process of rainfall.