Passage 112.1
पुरुषँ सोम्योतोपतापिनं ज्ञातयः पर्युपासते जानासि मां जानासि मामिति । तस्य यावन्न वाङ्मनसि सम्पद्यते मनः प्राणे प्राणस्तेजसि तेजः परस्यां देवतायां तावज्जानाति ॥ १ ॥
पदच्छेद
अन्वय
सोम्य, उत उपतापिनम् पुरुषम् ज्ञातयः, माम् जानासि; माम् जानासि इति पर्युपासते । तस्य यावत् वाक् मनसि न सम्पद्यते, मनः प्राणे [न सम्पद्यते], प्राणः तेजसि [न सम्पद्यते], तेजः परस्याम् देवतायाम् [न सम्पद्यते], तावत् [सः] जानाति ।
हिन्दी अर्थ
“प्रिय, किसी रोग से संतप्त मनुष्य के पास उसके सम्बन्धी बैठते हैं और पूछते हैं, ‘क्या मुझे पहचानते हो? क्या मुझे पहचानते हो?’ जब तक उसकी वाणी मन में, मन प्राण में, प्राण तेज में और तेज परम देवता में नहीं मिला है, तब तक वह पहचानता है।”
English meaning
“My dear, relatives sit around a person afflicted by illness and ask, ‘Do you recognize me? Do you recognize me?’ As long as his speech has not merged into mind, mind into vital breath, vital breath into heat, and heat into the highest deity, he recognizes them.”
व्याख्या
जानासि को सम्बन्धियों की पहचान के अर्थ में रखा गया है। दो बार पूछना मूल की पुनरावृत्ति है। विलय के चार चरण प्राचीन तत्त्व-विचार हैं; वे चेतना जाँचने के आधुनिक चिकित्सकीय निर्देश नहीं हैं।
Explanation
Jānāsi concerns recognition of relatives here. The question is repeated twice in the text. The four merging stages are an ancient elemental account, not modern clinical instructions for assessing consciousness.
संदर्भ
अन्तिम समय का दृश्य पहले बताए विलय-क्रम को मानवीय प्रसंग देता है।
Context
A scene at the end of life gives a human setting to the previously stated sequence of merging.