Passage 147.4
तौ हान्वीक्ष्य प्रजापतिरुवाचानुपलभ्यात्मानमननुविद्य व्रजतो यतर एतदुपनिषदो भविष्यन्ति देवा वासुरा वा ते पराभविष्यन्तीति स ह शान्तहृदय एव विरोचनोऽसुराञ्जगाम तेभ्यो हैतामुपनिषदं प्रोवाचात्मैवेह महय्य आत्मा परिचर्य आत्मानमेवेह महयन्नात्मानं परिचरन्नुभौ लोकाववाप्नोतीमं चामुं चेति ॥ ४ ॥
पदच्छेद
अन्वय
प्रजापतिः तौ ह अन्वीक्ष्य उवाच—आत्मानम् अनुपलभ्य अननुविद्य व्रजतः । यतरे देवाः वा असुराः वा एतदुपनिषदः भविष्यन्ति, ते पराभविष्यन्ति इति । सः ह विरोचनः शान्तहृदयः एव असुरान् जगाम । तेभ्यः ह एताम् उपनिषदम् प्रोवाच—इह आत्मा एव महय्यः; आत्मा परिचर्यः [अस्ति] । इह आत्मानम् एव महयन् आत्मानम् परिचरन् उभौ लोकौ इमम् च अमुम् च अवाप्नोति इति ।
हिन्दी अर्थ
उन्हें जाते हुए देखकर प्रजापति ने कहा, “ये आत्मा को पाए बिना, आत्मा को जाने बिना जा रहे हैं। देव हों या असुर, जो भी इस समझ को अपना उपदेश बनाएँगे, वे पराभव को प्राप्त होंगे।” विरोचन सन्तुष्ट मन से असुरों के पास पहुँचा और उन्हें यह शिक्षा दी: “यहाँ अपने इस आत्मरूप शरीर का ही सम्मान करना चाहिए और उसी की सेवा करनी चाहिए। यहाँ उसी का सम्मान और सेवा करके मनुष्य दोनों लोकों, इस लोक और परलोक, को प्राप्त करता है।”
English meaning
Watching them leave, Prajāpati said, “They are departing without apprehending the self, without knowing it. Whether gods or asuras, those who take this understanding as their teaching will come to defeat.” Virocana, still content, went to the asuras and taught them: “Here one should honor this self, understood as the body, and attend to it. By honoring and attending to this self here, one attains both worlds, this world and the other.”
व्याख्या
अनुपलभ्य और अननुविद्य दोनों निषेध निर्णायक हैं। विरोचन के वाक्य में आत्मा को शरीर मानना प्रसंग से स्पष्ट होता है; अनुवाद में यह व्याख्यात्मक संकेत दिया गया है। इसे प्रजापति की अन्तिम शिक्षा नहीं समझना चाहिए।
Explanation
Both negatives, not apprehending and not knowing, are decisive. Virocana’s bodily understanding of self is supplied by the narrative context and is marked in the translation. His instruction is not Prajāpati’s final teaching.
संदर्भ
गुरु की टिप्पणी और विरोचन का उपदेश अलग-अलग दृष्टियाँ हैं।
Context
The teacher’s comment and Virocana’s instruction express different understandings.