Passage 64.3
ब्रह्मणः सोम्य ते पादं ब्रवाणीति ब्रवीतु मे भगवानिति तस्मै होवाच प्राणः कला चक्षुः कला श्रोत्रं कला मनः कलैष वै सोम्य चतुष्कलः पादो ब्रह्मण आयतनवान्नाम ॥ ३ ॥
पदच्छेद
अन्वय
[मद्गुः आह—] सोम्य, ब्रह्मणः ते पादम् ब्रवाणि इति । [सत्यकामः आह—] भगवान् मे ब्रवीतु इति । [मद्गुः] तस्मै ह उवाच—प्राणः कला [अस्ति]; चक्षुः कला [अस्ति]; श्रोत्रम् कला [अस्ति]; मनः कला [अस्ति] । सोम्य, वै एषः ब्रह्मणः चतुष्कलः पादः आयतनवान् नाम [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
मद्गु ने कहा: “प्रिय, मैं तुम्हें ब्रह्म का एक पाद बताऊँ।” उसने कहा: “भगवन्, मुझे बताइए।” मद्गु ने कहा: “प्राण एक कला है, आँख एक कला है, कान एक कला है और मन एक कला है। प्रिय, ब्रह्म का यह चार कलाओं वाला पाद आयतनवान् कहलाता है।”
English meaning
The diving bird said, “Dear one, let me tell you a quarter of Brahman.” He replied, “Please tell me, sir.” The bird said, “Vital breath is one part, sight one part, hearing one part, and mind one part. Dear one, this four-part quarter of Brahman is called Possessed of a Dwelling.”
व्याख्या
आयतन आधार, निवास या टिकने का स्थान है। आयतनवान् को केवल घर-मकान का स्वामी समझना संकीर्ण होगा। प्राण, दृष्टि, श्रवण और मन मिलकर इस उपासना में अनुभव के आधारों का रूप लेते हैं।
Explanation
Āyatana is a dwelling, support or place of resting. The name is broader than ownership of a house. Breath, sight, hearing and mind form supports of embodied experience in this contemplation.
संदर्भ
दिशाओं, व्यापक क्षेत्रों और ज्योतियों के बाद चौथा पाद व्यक्ति की जीवन-शक्तियों तक आता है।
Context
After directions, regions and lights, the fourth quarter turns to the faculties of the individual.