Passage 74.7
ते ह प्राणाः प्रजापतिं पितरमेत्योचुर्भगवन्को नः श्रेष्ठ इति तान्होवाच यस्मिन्व उत्क्रान्ते शरीरं पापिष्ठतरमिव दृश्येत स वः श्रेष्ठ इति ॥ ७ ॥
पदच्छेद
अन्वय
ते ह प्राणाः पितरम् प्रजापतिम् एत्य ऊचुः—भगवन्, नः कः श्रेष्ठः [अस्ति] इति । [प्रजापतिः] तान् ह उवाच—वः यस्मिन् उत्क्रान्ते शरीरम् पापिष्ठतरम् इव दृश्येत, सः वः श्रेष्ठः [अस्ति] इति ।
हिन्दी अर्थ
वे प्राण अपने पिता प्रजापति के पास जाकर बोले, “भगवन्, हममें श्रेष्ठ कौन है?” उन्होंने कहा, “तुममें जिसके निकल जाने पर शरीर सबसे बुरी दशा में दिखे, वही तुममें श्रेष्ठ है।”
English meaning
The vital powers went to their father Prajāpati and asked, “Revered one, which of us is best?” He told them, “Whichever one leaves the body looking most wretched when it departs is the best among you.”
व्याख्या
पापिष्ठतरम् यहाँ शरीर की अत्यन्त असहाय या बिगड़ी अवस्था है, नैतिक अपराध का आरोप नहीं। यस्मिन् उत्क्रान्ते का भाव “जिसके निकल जाने पर” है।
Explanation
Pāpiṣṭhataram here describes a body in a badly impaired state, not moral guilt. The locative construction means “when that one has departed.”
संदर्भ
प्रजापति श्रेष्ठता का निर्णय अधिकार से नहीं, अनुपस्थिति के प्रभाव से करने को कहते हैं।
Context
Prajāpati proposes judging superiority by the effect of a power’s absence rather than by assertion.