Passage 119.1
ध्यानं वाव चित्ताद्भूयो ध्यायतीव पृथिवी ध्यायतीवान्तरिक्षं ध्यायतीव द्यौर्ध्यायन्तीवापो ध्यायन्तीव पर्वता देवमनुष्यास्तस्माद्य इह मनुष्याणां महत्तां प्राप्नुवन्ति ध्यानापादाँशा इवैव ते भवन्त्यथ येऽल्पाः कलहिनः पिशुना उपवादिनस्तेऽथ ये प्रभवो ध्यानापादाँशा इवैव ते भवन्ति ध्यानमुपास्स्वेति ॥ १ ॥
पदच्छेद
अन्वय
ध्यानम् वाव चित्तात् भूयः [अस्ति] । पृथिवी ध्यायति इव; अन्तरिक्षम् ध्यायति इव; द्यौः ध्यायति इव; आपः ध्यायन्ति इव; पर्वताः ध्यायन्ति इव; देवमनुष्याः [ध्यायन्ति इव] । तस्मात् ये इह मनुष्याणाम् महत्ताम् प्राप्नुवन्ति, ते ध्यानापादांशाः इव एव भवन्ति । अथ ये अल्पाः, ते कलहिनः पिशुनाः उपवादिनः [सन्ति] । अथ ये प्रभवः, ते ध्यानापादांशाः इव एव भवन्ति । ध्यानम् उपास्स्व इति [उवाच] ।
हिन्दी अर्थ
“ध्यान चित्त से बढ़कर है। पृथिवी मानो ध्यान करती है; अन्तरिक्ष मानो ध्यान करता है; द्युलोक मानो ध्यान करता है; जल मानो ध्यान करता है; पर्वत, देवता और मनुष्य मानो ध्यान करते हैं। इसीलिए यहाँ मनुष्यों में जो महानता पाते हैं, वे मानो ध्यान का कुछ अंश पाए हुए होते हैं। जो छोटे मन वाले हैं, वे झगड़ालू, चुगलखोर और दूसरों की निन्दा करने वाले होते हैं; और जो प्रभावशाली हैं, वे मानो ध्यान का कुछ अंश पाए हुए होते हैं। ध्यान की उपासना करो।”
English meaning
“Meditation is greater than attentive understanding. The earth seems to meditate; the middle region seems to meditate; heaven seems to meditate; the waters seem to meditate; mountains, gods and humans seem to meditate. Thus those among people who attain greatness appear to possess a share in meditation. Those of little stature are quarrelsome, tale-bearing and fault-finding; those who have real influence appear to possess a share in meditation. Contemplate meditation.”
व्याख्या
बार-बार आया इव, “मानो”, उपमात्मक भाषा को स्पष्ट करता है। पाठ ध्यान की महिमा के लिए सामाजिक विरोध रखता है; इसे हर विवादशील व्यक्ति की मानसिक अवस्था का अचूक निदान नहीं बनाना चाहिए। ध्यानापादांश का गठन कठिन है और अर्थ को सावधानी से “ध्यान में हिस्सा” कहा गया है।
Explanation
The repeated iva, “as if,” marks the comparison. The social contrast praises meditation; it is not an infallible diagnosis of every argumentative person. The compound dhyānāpādāṃśa is difficult, and is cautiously rendered as sharing in meditation.
संदर्भ
चित्त की समझ से ध्यान की स्थिरता की ओर बढ़ते हुए प्राकृतिक जगत् की निश्चलता उपमा बनती है।
Context
The transition from understanding to meditative steadiness draws on the apparent stillness of the natural world.