Passage 113.1
पुरुषँ सोम्योत हस्तगृहीतमानयन्त्यपहार्षीत्स्तेयमकार्षीत्परशुमस्मै तपतेति स यदि तस्य कर्ता भवति तत एवानृतमात्मानं कुरुते सोऽनृताभिसन्धोऽनृतेनात्मानमन्तर्धाय परशुं तप्तं प्रतिगृह्णाति स दह्यतेऽथ हन्यते ॥ १ ॥
पदच्छेद
अन्वय
सोम्य, उत हस्तगृहीतम् पुरुषम् आनयन्ति; [अयम्] अपहार्षीत्, स्तेयम् अकार्षीत्, अस्मै परशुम् तपत इति [आहुः] । सः यदि तस्य कर्ता भवति, ततः एव आत्मानम् अनृतम् कुरुते । सः अनृताभिसन्धः अनृतेन आत्मानम् अन्तर्धाय तप्तम् परशुम् प्रतिगृह्णाति; सः दह्यते, अथ हन्यते ।
हिन्दी अर्थ
“प्रिय, किसी मनुष्य को हाथ पकड़कर लाते हैं और कहते हैं, ‘इसने कुछ उठाया है, चोरी की है; इसके लिए कुल्हाड़ी गरम करो।’ यदि उसने वह काम किया है, तो वह अपने को असत्य बनाता है। असत्य का आश्रय लेकर, अपने को असत्य से ढककर वह तप्त कुल्हाड़ी पकड़ता है। वह जल जाता है और फिर मारा जाता है।”
English meaning
“My dear, they bring a man seized by the hand, saying, ‘He has taken something; he has committed theft. Heat an axe for him.’ If he has done it, he makes himself false. Intent on falsehood and covering himself with falsehood, he takes hold of the heated axe. He is burned and then put to death.”
व्याख्या
यह न्याय की ऐतिहासिक अग्नि-परीक्षा का वर्णन है, अपनाने योग्य तरीका नहीं। गर्म धातु पकड़ना गम्भीर चोट दे सकता है और अपराध या सत्य का विश्वसनीय परीक्षण नहीं है। कथानक का हिंसक परिणाम छिपाया नहीं गया।
Explanation
This describes a historical judicial ordeal, not a practice to adopt. Grasping heated metal can cause serious injury and is not a reliable test of guilt or truth. The narrative’s violent outcome is not concealed.
संदर्भ
अन्तिम दृष्टान्त असत्य से जुड़ने के परिणाम को प्राचीन अग्नि-परीक्षा से दिखाता है।
Context
The final comparison uses an ancient ordeal to illustrate the consequence of alignment with falsehood.