Passage 114.1
अधीहि भगव इति होपससाद सनत्कुमारं नारदस्तँ होवाच यद्वेत्थ तेन मोपसीद ततस्त ऊर्ध्वं वक्ष्यामीति स होवाच ॥ १ ॥
पदच्छेद
अन्वय
नारदः, भगवः, अधीहि इति ह सनत्कुमारम् उपससाद । [सनत्कुमारः] तम् ह, यत् वेत्थ, तेन मा उपसीद; ततः ते ऊर्ध्वम् वक्ष्यामि इति उवाच । सः [नारदः] ह उवाच ।
हिन्दी अर्थ
“भगवन्, मुझे शिक्षा दीजिए”, ऐसा कहते हुए नारद सनत्कुमार के पास आए। सनत्कुमार ने उनसे कहा: “तुम जो जानते हो, उसे बताकर मेरे पास आओ; तब मैं तुम्हें उससे आगे की शिक्षा दूँगा।” नारद ने कहा:
English meaning
“Revered sir, teach me,” said Nārada as he approached Sanatkumāra. Sanatkumāra told him, “Approach me with an account of what you know; then I shall teach you what lies beyond it.” Nārada replied:
व्याख्या
अधीहि यहाँ शिक्षा देने का अनुरोध है। ऊर्ध्वम् आगे या अधिक ऊँची समझ की ओर संकेत करता है; गुरु अभी किसी एक अन्तिम सिद्धान्त का नाम नहीं बताते।
Explanation
Adhīhi functions here as a request for instruction. Ūrdhvam points to a further or higher understanding, without yet identifying the final teaching.
संदर्भ
नारद और सनत्कुमार के संवाद का आरम्भ शिष्य की वर्तमान विद्या जानने से होता है।
Context
The dialogue opens by establishing what the student already knows.