Passage 126.1
स्मरो वावाकाशाद्भूयस्तस्माद्यद्यपि बहव आसीरन्न स्मरन्तो नैव ते कञ्चन शृणुयुर्न मन्वीरन्न विजानीरन्यदा वाव ते स्मरेयुरथ शृणुयुरथ मन्वीरन्नथ विजानीरन्स्मरेण वै पुत्रान्विजानाति स्मरेण पशून्स्मरमुपास्स्वेति ॥ १ ॥
पदच्छेद
अन्वय
स्मरः वाव आकाशात् भूयः [अस्ति] । तस्मात् यदि अपि बहवः आसीरन्, न स्मरन्तः ते कञ्चन न एव शृणुयुः, न मन्वीरन्, न विजानीरन् । यदा वाव ते स्मरेयुः, अथ शृणुयुः, अथ मन्वीरन्, अथ विजानीरन् । स्मरेण वै पुत्रान् विजानाति, स्मरेण पशून् [विजानाति] । स्मरम् उपास्स्व इति [उवाच] ।
हिन्दी अर्थ
“स्मरण आकाश से बढ़कर है। इसीलिए बहुत-से लोग साथ बैठे हों, पर यदि उन्हें स्मरण न हो, तो वे किसी की बात न सुन सकें, न उस पर विचार कर सकें, न उसे समझ सकें। जब उन्हें स्मरण हो, तभी वे सुन सकें, विचार कर सकें और समझ सकें। स्मरण से ही मनुष्य अपने पुत्रों को पहचानता है और स्मरण से अपने पशुओं को। स्मरण की उपासना करो।”
English meaning
“Memory is greater than space. Even if many people sit together, without remembering they could neither hear anyone meaningfully, nor think, nor understand. When they remember, they can hear, think and understand. Through memory one recognizes one’s sons, and through memory one’s livestock. Contemplate memory.”
व्याख्या
स्मर यहाँ कामदेव का नाम नहीं, स्मरण की क्रिया और क्षमता है। सुनना स्मृति-सहायित अर्थग्रहण के सन्दर्भ में है; वाक्य कान की यांत्रिक क्रिया के निषेध का वैज्ञानिक दावा नहीं करता।
Explanation
Smara here means remembering, not the deity of love. Hearing is discussed as meaningful reception supported by memory, rather than as a scientific denial of the ear’s mechanical operation.
संदर्भ
एक स्थान में साथ होने से अधिक महत्त्व उस स्मरण को दिया जाता है जो पहचान और समझ सम्भव करता है।
Context
Memory is placed beyond merely sharing a space because it makes recognition and comprehension possible.