Passage 16.1
वृष्टौ पञ्चविधꣳ सामोपासीत पुरोवातो हिङ्कारो मेघो जायते स प्रस्तावो वर्षति स उद्गीथो विद्योतते स्तनयति स प्रतिहार ॥ १ ॥
पदच्छेद
अन्वय
वृष्टौ पञ्चविधम् साम उपासीत । पुरोवातः हिङ्कारः [अस्ति] । मेघः जायते, सः प्रस्तावः [अस्ति] । वर्षति, सः उद्गीथः [अस्ति] । विद्योतते स्तनयति, सः प्रतिहारः [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
वर्षा में पाँच अंगों वाले साम की उपासना करे: आगे चलने वाली हवा हिङ्कार है; बादल बनता है, वह प्रस्ताव है; वर्षा होती है, वह उद्गीथ है; बिजली चमकती है और गर्जन होता है, वह प्रतिहार है।
English meaning
One should contemplate the five-part Sāman in rainfall: the preceding wind is hiṅkāra; the formation of a cloud is prastāva; the falling rain is udgītha; lightning and thunder are pratihāra.
व्याख्या
इस अनुच्छेद में चार अंग वर्णित हैं; पाँचवाँ चयनित पाठ के अगले अनुच्छेद में आता है। अन्त का प्रतिहारः पदच्छेद में विसर्गयुक्त व्याकरणिक रूप है।
Explanation
Four portions appear here; the fifth begins the next passage in the selected edition. The final pratihāraḥ restores the grammatical nominative ending in the word analysis.
संदर्भ
वर्षा की क्रमिक अवस्थाओं में पाँच अंगों वाला साम देखा जाता है। चयनित पाठ में वर्षा थमने की अवस्था अगले अनुच्छेद के आरम्भ में है।
Context
The stages of rainfall are read as a five-part Sāman. In the selected text the cessation of rain begins the second passage.