Passage 109.1
न्यग्रोधफलमत आहरेतीदं भगव इति भिन्द्धीति भिन्नं भगव इति किमत्र पश्यसीत्यण्व्य इवेमा धाना भगव इत्यासामङ्गैकां भिन्द्धीति भिन्ना भगव इति किमत्र पश्यसीति न किञ्चन भगव इति ॥ १ ॥
पदच्छेद
अन्वय
[पिता], अतः न्यग्रोधफलम् आहर इति [उवाच] । [पुत्रः], भगवः, इदम् [फलम्] इति [उवाच] । [पिता], [फलम्] भिन्द्धि इति [उवाच] । [पुत्रः], भगवः, [फलम्] भिन्नम् इति [उवाच] । [पिता], अत्र किम् पश्यसि इति [पप्रच्छ] । [पुत्रः], भगवः, इमाः धानाः अण्व्यः इव [सन्ति] इति [उवाच] । [पिता], अङ्ग, आसाम् एकाम् [धानाम्] भिन्द्धि इति [उवाच] । [पुत्रः], भगवः, [धाना] भिन्ना इति [उवाच] । [पिता], अत्र किम् पश्यसि इति [पप्रच्छ] । [पुत्रः], भगवः, न किञ्चन [पश्यामि] इति [उवाच] ।
हिन्दी अर्थ
उन्होंने कहा, “वहाँ से एक बरगद का फल लाओ।” “यह रहा, भगवन्।” “इसे तोड़ो।” “तोड़ दिया, भगवन्।” “इसमें क्या देखते हो?” “ये बहुत छोटे-छोटे बीज-से हैं, भगवन्।” “अच्छा, इनमें से एक को तोड़ो।” “तोड़ दिया, भगवन्।” “इसमें क्या देखते हो?” “कुछ भी नहीं, भगवन्।”
English meaning
He said, “Bring a banyan fruit from there.” “Here it is, sir.” “Break it open.” “It is broken, sir.” “What do you see in it?” “These seem to be very tiny seeds, sir.” “Now break one of them.” “It is broken, sir.” “What do you see in it?” “Nothing at all, sir.”
व्याख्या
न्यग्रोध बरगद है। पहले फल, फिर उसके एक बीज को खोला जाता है; दोनों चरणों के प्रश्न और उत्तर पूरे हैं। कुछ न दिखाई देने का उत्तर श्वेतकेतु के निरीक्षण का है, किसी आधार के न होने का निष्कर्ष नहीं।
Explanation
Nyagrodha is the banyan. First the fruit and then one seed are opened, with both rounds of questions and replies retained. Seeing nothing is Śvetaketu’s report of observation, not a conclusion that no basis exists.
संदर्भ
फल और बीज को खोलकर दृश्य बड़े वृक्ष के सूक्ष्म आधार का प्रश्न उठता है।
Context
Opening the fruit and seed raises the question of the large visible tree’s subtle basis.