Passage 128.1
प्राणो वा आशाया भूयान्यथा वा अरा नाभौ समर्पिता एवमस्मिन्प्राणे सर्वँ समर्पितं प्राणः प्राणेन याति प्राणः प्राणं ददाति प्राणाय ददाति प्राणो ह पिता प्राणो माता प्राणो भ्राता प्राणः स्वसा प्राण आचार्यः प्राणो ब्राह्मणः ॥ १ ॥
पदच्छेद
अन्वय
प्राणः वा आशायाः भूयान् [अस्ति] । यथा वा अराः नाभौ समर्पिताः [सन्ति], एवम् अस्मिन् प्राणे सर्वम् समर्पितम् [अस्ति] । प्राणः प्राणेन याति; प्राणः प्राणम् ददाति; [प्राणः] प्राणाय ददाति । प्राणः ह पिता [अस्ति]; प्राणः माता [अस्ति]; प्राणः भ्राता [अस्ति]; प्राणः स्वसा [अस्ति]; प्राणः आचार्यः [अस्ति]; प्राणः ब्राह्मणः [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
“प्राण आशा से बढ़कर है। जैसे रथ के पहिए की अराएँ नाभि में जुड़ी रहती हैं, वैसे ही इस प्राण में सब कुछ जुड़ा है। प्राण प्राण के द्वारा चलता है; प्राण प्राण को देता है और प्राण के लिए देता है। प्राण ही पिता है, प्राण माता है, प्राण भाई है, प्राण बहन है, प्राण आचार्य है, प्राण ब्राह्मण है।”
English meaning
“Life-breath is greater than hope. As the spokes of a wheel are joined in its hub, everything is joined in this life-breath. Life-breath moves by life-breath; life-breath gives life-breath and gives to life-breath. Life-breath is the father, the mother, the brother, the sister, the teacher and the brahmin.”
व्याख्या
नाभि पहिए का केन्द्रीय भाग है। देने वाले, दिए जाने वाले और पाने वाले को प्राण के रूप में कहना जीवन की परस्परता की उपासना है। प्राण को केवल फेफड़ों की हवा तक सीमित नहीं किया गया है।
Explanation
The hub is the wheel’s center. Describing giver, gift and recipient as life-breath offers a contemplation of life’s interdependence. Prāṇa is not reduced to air in the lungs.
संदर्भ
आशा से प्राण की ओर आने पर संवाद जीवित व्यक्तियों और सम्बन्धों के आधार तक पहुँचता है।
Context
The move from hope to life-breath brings the inquiry to the basis of living persons and relationships.