Passage 138.1
स एवाधस्तात्स उपरिष्टात्स पश्चात्स पुरस्तात्स दक्षिणतः स उत्तरतः स एवेदँ सर्वमित्यथातोऽहङ्कारादेश एवाहमेवाधस्तादहमुपरिष्टादहं पश्चादहं पुरस्तादहं दक्षिणतोऽहमुत्तरतोऽहमेवेदँ सर्वमिति ॥ १ ॥
पदच्छेद
अन्वय
सः एव अधस्तात् [अस्ति], सः उपरिष्टात् [अस्ति], सः पश्चात् [अस्ति], सः पुरस्तात् [अस्ति], सः दक्षिणतः [अस्ति], सः उत्तरतः [अस्ति]; सः एव इदम् सर्वम् [अस्ति] इति । अथ अतः अहङ्कारादेशः एव [भवति]—अहम् एव अधस्तात् [अस्मि], अहम् उपरिष्टात् [अस्मि], अहम् पश्चात् [अस्मि], अहम् पुरस्तात् [अस्मि], अहम् दक्षिणतः [अस्मि], अहम् उत्तरतः [अस्मि]; अहम् एव इदम् सर्वम् [अस्मि] इति ।
हिन्दी अर्थ
“वही नीचे है, वही ऊपर है, वही पीछे है, वही आगे है, वही दक्षिण में है, वही उत्तर में है; वही यह सब है। अब इसी की शिक्षा ‘मैं’ के रूप में है: मैं ही नीचे हूँ, मैं ऊपर हूँ, मैं पीछे हूँ, मैं आगे हूँ, मैं दक्षिण में हूँ, मैं उत्तर में हूँ; मैं ही यह सब हूँ।”
English meaning
“It alone is below, it is above, it is behind, it is in front, it is to the south, it is to the north; it alone is all this. Now comes the instruction in terms of ‘I’: I alone am below, I am above, I am behind, I am in front, I am to the south, I am to the north; I alone am all this.”
व्याख्या
अहङ्कारादेश यहाँ “अहं” शब्द से किया गया निर्देश है; इसे सामान्य अहंकार या आत्ममुग्धता की प्रशंसा नहीं बनाया गया। दिशा-सूची दोनों बार पूरी है। पीछे-आगे को पश्चिम-पूर्व भी समझा जा सकता है; अनुवाद ने पाठ का शारीरिक-दिशात्मक अर्थ रखा है।
Explanation
Ahaṅkārādeśa here is an instruction through the expression “I,” not praise of ordinary egotism. The complete directional sequence occurs twice. Behind and in front may also suggest west and east; the translation retains their bodily-directional wording.
संदर्भ
भूमा की व्यापकता पहले “वह” और फिर “मैं” के सर्वदिशात्मक कथन से व्यक्त होती है।
Context
Bhūman’s comprehensiveness is expressed first as “it” and then through an all-directional instruction using “I.”