Passage 22.1
अथ खल्वमुमादित्यꣳ सप्तविधꣳ सामोपासीत सर्वदा समस्तेन साम मां प्रति मां प्रतीति सर्वेण समस्तेन साम ॥ १ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अथ खलु अमुम् आदित्यम् सप्तविधम् साम उपासीत । [सः] सर्वदा समः [अस्ति]; तेन साम [इति उच्यते] । माम् प्रति माम् प्रति इति सर्वेण समः [अस्ति]; तेन साम [इति उच्यते] ।
हिन्दी अर्थ
अब उस आदित्य की सात अंगों वाले साम के रूप में उपासना करे। वह सदा समान है, इसलिए साम है। सबको लगता है, “वह मेरी ओर है, मेरी ओर है”; वह सबके प्रति समान है, इसलिए साम है।
English meaning
One should now contemplate that sun as the seven-part Sāman. It is always equal, and therefore sāman. Everyone says, “It faces me, it faces me”; it is equal toward all, and therefore sāman.
व्याख्या
साम और सम के ध्वनि-साम्य पर उपासना आधारित है। सूर्य का सबके सम्मुख दिखाई देना यहाँ निष्पक्ष समता का बिम्ब है।
Explanation
The contemplation rests on the likeness of sāman and sama, “equal.” The sun’s seeming to face everyone supplies an image of impartial equality.
संदर्भ
सूर्य की दैनिक गति को सात अंगों वाला साम माना गया है। दिन की प्रत्येक अवस्था के साथ जीवों का एक वर्ग सम्बद्ध किया जाता है।
Context
The sun’s daily course is contemplated as a seven-part Sāman. Each phase of the day is linked with a class of beings.