Passage 3.4
या वाक्सर्क्तस्मादप्राणन्ननपानन्नृचमभिव्याहरति यर्क्तत्साम तस्मादप्राणन्ननपानन्साम गायति यत्साम स उद्गीथस्तस्मादप्राणन्ननपानन्नुद्गायति ॥ ४ ॥
पदच्छेद
अन्वय
या वाक् [अस्ति], सा ऋक् [अस्ति] । तस्मात् अप्राणन् अनपानन् ऋचम् अभिव्याहरति । या ऋक् [अस्ति], तत् साम [अस्ति] । तस्मात् अप्राणन् अनपानन् साम गायति । यत् साम [अस्ति], सः उद्गीथः [अस्ति] । तस्मात् अप्राणन् अनपानन् उद्गायति ।
हिन्दी अर्थ
जो वाणी है, वही ऋक् है; इसलिए प्राण और अपान की उन क्रियाओं के बिना ऋक् उच्चरित की जाती है। जो ऋक् है, वही साम है; इसलिए वैसे ही साम गाया जाता है। जो साम है, वही उद्गीथ है; इसलिए वैसे ही उद्गान किया जाता है।
English meaning
Speech is the ṛc; thus the ṛc is uttered without those acts of prāṇa and apāna. The ṛc is the Sāman; thus the Sāman is sung in the same way. The Sāman is the udgītha; thus the udgītha is likewise sung.
व्याख्या
यहाँ पहचानें कार्य-सम्बन्ध से बनती हैं: ऋक् वाणी का विशेष रूप है, साम ऋक् पर आधारित गायन है, और उद्गीथ साम का भाग है। इसलिए एक ही जीवन-क्रिया को इन सबका आधार माना जाता है। कथन को गायन के समय श्वास रोकने की व्यावहारिक सलाह न समझें।
Explanation
The identifications rest on functional relationships: the ṛc is a form of speech, Sāman singing rests on a ṛc, and the udgītha forms part of a Sāman. The same vital activity is therefore taken as their support. The claim is not practical advice to suspend breathing during song.
संदर्भ
व्यान और वाणी का सम्बन्ध अब ऋक्, साम और उद्गीथ की पूरी शृंखला में फैलाया जाता है।
Context
The connection between vyāna and speech is extended through the sequence of ṛc, Sāman and udgītha.