Passage 83.8
अथैतयोः पथोर्न कतरेण च न तानीमानि क्षुद्राण्यसकृदावर्तीनि भूतानि भवन्ति जायस्व म्रियस्वेत्येतत्तृतीयँस्थानं तेनासौ लोको न सम्पूर्यते तस्माज्जुगुप्सेत तदेष श्लोकः ॥ ८ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अथ [यानि] एतयोः पथोः कतरेण चन न [यान्ति], तानि इमानि क्षुद्राणि असकृदावर्तीनि भूतानि भवन्ति—जायस्व, म्रियस्व इति । एतत् तृतीयम् स्थानम् [अस्ति] । तेन असौ लोकः न सम्पूर्यते । तस्मात् [संसारगतिम्] जुगुप्सेत । तत् एषः श्लोकः [भवति] ।
हिन्दी अर्थ
जो इन दोनों मार्गों में से किसी पर भी नहीं जाते, वे बार-बार लौटने वाले छोटे जीव बनते हैं। “जन्म लो, मरो” यही उनकी तीसरी अवस्था है। इसलिए वह लोक भरता नहीं है। इसी कारण इस दशा से बचने की इच्छा करे। इस विषय में यह श्लोक है।
English meaning
Those who follow neither of these two paths become small beings that return again and again. “Be born, die”: this is their third condition. Thus that other world does not become full. One should therefore seek to avoid this condition. On this there is a verse.
व्याख्या
जायस्व म्रियस्व जन्म-मरण के आवर्तन को संक्षेप में व्यक्त करता है। जुगुप्सेत का आशय उससे बचना चाहना है; छोटे जीवों से घृणा या उन्हें क्षति पहुँचाने की सलाह निकालना अनुचित होगा।
Explanation
“Be born, die” condenses repeated birth and death. Jugupseta expresses a wish to avoid that condition; it should not be taken as advice to despise or injure small creatures.
संदर्भ
तीसरी गति बताकर “दूसरा लोक भरता क्यों नहीं” प्रश्न का उत्तर दिया जाता है।
Context
A third course answers the question of why the other world does not fill up.