Passage 83.2
मासेभ्यः संवत्सरँ संवत्सरादादित्यमादित्याच्चन्द्रमसं चन्द्रमसो विद्युतं तत्पुरुषोऽमानवः स एनान्ब्रह्म गमयत्येष देवयानः पन्था इति ॥ २ ॥
पदच्छेद
अन्वय
मासेभ्यः संवत्सरम् [अभिसम्भवन्ति]; संवत्सरात् आदित्यम् [अभिसम्भवन्ति]; आदित्यात् चन्द्रमसम् [अभिसम्भवन्ति]; चन्द्रमसः विद्युतम् [अभिसम्भवन्ति] । तत् [तत्र] पुरुषः अमानवः [अस्ति] । सः एनान् ब्रह्म गमयति । एषः देवयानः पन्थाः [अस्ति] इति ।
हिन्दी अर्थ
उन महीनों से वे संवत्सर तक, संवत्सर से सूर्य तक, सूर्य से चन्द्रमा तक और चन्द्रमा से बिजली तक जाते हैं। वहाँ एक अमानव पुरुष होता है; वह उन्हें ब्रह्म तक पहुँचाता है। यही देवयान मार्ग है।
English meaning
From those months they go to the year, from the year to the sun, from the sun to the moon, and from the moon to lightning. There is a nonhuman person there who leads them to Brahman. This is the path of the gods.
व्याख्या
अमानव पुरुष को पाठ केवल मनुष्य से भिन्न कहता है; उसका नया नाम या रूप जोड़ना आवश्यक नहीं। वर्ष, सूर्य, चन्द्रमा और विद्युत को एक ही प्रकाश-लोक में समेटने से यात्रा का क्रम खो जाएगा।
Explanation
The guide is described only as nonhuman; the text gives no further name or appearance to supply. Year, sun, moon and lightning must remain distinct stages rather than being collapsed into a single realm of light.
संदर्भ
पहले मार्ग के शेष पड़ाव और उसका ब्रह्म-गामी नेतृत्व बताए जाते हैं।
Context
The remaining stages of the first path and its guide to Brahman are given.