Passage 83.4
मासेभ्यः पितृलोकं पितृलोकादाकाशमाकाशाच्चन्द्रमसमेष सोमो राजा तद्देवानामन्नं तं देवा भक्षयन्ति ॥ ४ ॥
पदच्छेद
अन्वय
मासेभ्यः पितृलोकम् [अभिसम्भवन्ति]; पितृलोकात् आकाशम् [अभिसम्भवन्ति]; आकाशात् चन्द्रमसम् [अभिसम्भवन्ति] । एषः सोमः राजा [अस्ति] । तत् देवानाम् अन्नम् [अस्ति]; देवाः तम् भक्षयन्ति ।
हिन्दी अर्थ
महीनों से वे पितृलोक तक, पितृलोक से आकाश तक और आकाश से चन्द्रमा तक पहुँचते हैं। यही सोम राजा है; वह देवताओं का अन्न है और देवता उसका भोग करते हैं।
English meaning
From the months they reach the world of the ancestors, from that world space, and from space the moon. This is King Soma, the food of the gods, which the gods consume.
व्याख्या
देवताओं का अन्न बनना यज्ञ और भोग की प्रतीक-भाषा है। “भक्षयन्ति” को हटाया नहीं गया, लेकिन इससे भौतिक मानव-भक्षण का विवरण निकालना प्रसंग से बाहर होगा।
Explanation
Becoming food for the gods belongs to the symbolic language of sacrifice and enjoyment. The verb “consume” is retained without turning the passage into a physical account of human cannibalism.
संदर्भ
पितृयान के यात्री सोमरूप चन्द्रमा तक पहुँचते हैं।
Context
Travelers on the ancestors’ path arrive at the moon as Soma.