Passage 83.7
तद्य इह रमणीयचरणा अभ्याशो ह यत्ते रमणीयां योनिमापद्येरन्ब्राह्मणयोनिं वा क्षत्रिययोनिं वा वैश्ययोनिं वाथ य इह कपूयचरणा अभ्याशो ह यत्ते कपूयां योनिमापद्येरन् श्वयोनिं वा सूकरयोनिं वा चण्डालयोनिं वा ॥७॥
पदच्छेद
अन्वय
तत् ये इह रमणीयचरणाः [सन्ति], ते अभ्याशः ह यत् रमणीयाम् योनिम् आपद्येरन्—ब्राह्मणयोनिम् वा क्षत्रिययोनिम् वा वैश्ययोनिम् वा । अथ ये इह कपूयचरणाः [सन्ति], ते अभ्याशः ह यत् कपूयाम् योनिम् आपद्येरन्—श्वयोनिम् वा सूकरयोनिम् वा चण्डालयोनिम् वा ।
हिन्दी अर्थ
यहाँ जिनका आचरण सुन्दर है, उनके शीघ्र ही सुन्दर मानी गई योनि में, ब्राह्मण, क्षत्रिय या वैश्य की योनि में, जाने की सम्भावना कही गई है। और यहाँ जिनका आचरण निन्दित है, उनके शीघ्र ही निन्दित मानी गई योनि में, कुत्ते, सूअर या चाण्डाल की योनि में, जाने की सम्भावना कही गई है।
English meaning
Those whose conduct here is good are said to be likely soon to enter a birth considered good: that of a Brahmin, a Kṣatriya or a Vaiśya. Those whose conduct here is foul are said to be likely soon to enter a birth considered foul: that of a dog, a pig or a Caṇḍāla.
व्याख्या
यहाँ जन्माधारित सामाजिक ऊँच-नीच का ऐतिहासिक दावा है। अनुवाद सूची नहीं छिपाता, पर उसे आज किसी जाति या समुदाय की गरिमा, नैतिकता या अधिकार का मापदण्ड नहीं मानता। चाण्डाल प्राचीन रूप से हाशिये पर रखे समुदाय का नाम है।
Explanation
This is a historical claim framed by a birth-based social hierarchy. The translation does not hide the list, but it does not treat it as a measure of any caste or community’s dignity, morality or rights today. Caṇḍāla names a historically marginalized group.
संदर्भ
कर्म और पुनर्जन्म का सम्बन्ध पाठ की प्राचीन सामाजिक श्रेणियों में व्यक्त होता है।
Context
The connection of conduct and rebirth is expressed through the text’s ancient social classifications.