Passage 73.7
तद्यथा लवणेन सुवर्णꣳ सन्दध्यात्सुवर्णेन रजतꣳ रजतेन त्रपु त्रपुणा सीसꣳ सीसेन लोहं लोहेन दारु दारु चर्मणा ॥ ७ ॥
पदच्छेद
अन्वय
तत् यथा लवणेन सुवर्णम् सन्दध्यात्, सुवर्णेन रजतम् [सन्दध्यात्], रजतेन त्रपु [सन्दध्यात्], त्रपुणा सीसम् [सन्दध्यात्], सीसेन लोहम् [सन्दध्यात्], लोहेन दारु [सन्दध्यात्], चर्मणा दारु [सन्दध्यात्] ।
हिन्दी अर्थ
जैसे लवण से सोना, सोने से चाँदी, चाँदी से राँगा, राँगे से सीसा, सीसे से लोहा, लोहे से लकड़ी और चमड़े से लकड़ी जोड़ी जाए...
English meaning
Just as one might join gold with salt, silver with gold, tin with silver, lead with tin, iron with lead, wood with iron, and wood with leather...
व्याख्या
त्रपु राँगा या टिन है और सीस सीसा है। लवण किसी लवणीय सहायक पदार्थ का नाम हो सकता है; आधुनिक रसोई-नमक से सुरक्षित धातु-जोड़ की विधि मान लेना उचित नहीं। उपमा का फल अगले अनुच्छेद में है।
Explanation
Trapu is tin and sīsa is lead. Lavaṇa may designate a saline joining aid; the passage should not be treated as a safe modern soldering recipe using table salt. The analogy is completed in the next unit.
संदर्भ
यज्ञ की क्षति जोड़ने को समझाने के लिए धातु और अन्य पदार्थों को जोड़ने की उपमा आती है।
Context
The repair of the sacrifice is illustrated by joining metals and other materials.