Passage 75.5
वसिष्ठाय स्वाहेत्यग्नावाज्यस्य हुत्वा मन्थे सम्पातमवनयेत्प्रतिष्ठायै स्वाहेत्यग्नावाज्यस्य हुत्वा मन्थे सम्पातमवनयेत्सम्पदे स्वाहेत्यग्नावाज्यस्य हुत्वा मन्थे सम्पातमवनयेदायतनाय स्वाहेत्यग्नावाज्यस्य हुत्वा मन्थे सम्पातमवनयेत् ॥ ५ ॥
पदच्छेद
अन्वय
वसिष्ठाय स्वाहा इति अग्नौ आज्यस्य [अंशम्] हुत्वा मन्थे सम्पातम् अवनयेत् । प्रतिष्ठायै स्वाहा इति अग्नौ आज्यस्य [अंशम्] हुत्वा मन्थे सम्पातम् अवनयेत् । सम्पदे स्वाहा इति अग्नौ आज्यस्य [अंशम्] हुत्वा मन्थे सम्पातम् अवनयेत् । आयतनाय स्वाहा इति अग्नौ आज्यस्य [अंशम्] हुत्वा मन्थे सम्पातम् अवनयेत् ।
हिन्दी अर्थ
“वसिष्ठ के लिए स्वाहा” कहकर अग्नि में घृत अर्पित करे और शेष अंश मन्थ में डाले। “प्रतिष्ठा के लिए स्वाहा” कहकर घृत अर्पित करे और शेष अंश मन्थ में डाले। “सम्पद् के लिए स्वाहा” कहकर घृत अर्पित करे और शेष अंश मन्थ में डाले। “आयतन के लिए स्वाहा” कहकर घृत अर्पित करे और शेष अंश मन्थ में डाले।
English meaning
With “Svāhā to the most richly endowed,” offer ghee into the fire and pour the remnant into the mixture. With “Svāhā to the foundation,” offer ghee and pour the remnant into the mixture. With “Svāhā to attainment,” offer ghee and pour the remnant into the mixture. With “Svāhā to the dwelling place,” offer ghee and pour the remnant into the mixture.
व्याख्या
चार बार आहुति और चार बार शेष अंश डालने का निर्देश है; इसे एक सामान्य आहुति में समेटना अनुष्ठान की संरचना खो देगा। प्रतिष्ठा और सम्पद् के दत्तिव रूप स्त्रीलिंग हैं।
Explanation
There are four offerings and four transfers of the remnant; compressing them into a single generic offering would lose the ritual structure. The dative forms for foundation and attainment are feminine.
संदर्भ
प्राण से सम्बद्ध अन्य चार उपाधियों को क्रमशः आहुति दी जाती है।
Context
Four further attributes associated with breath receive offerings in sequence.