Passage 22.3
अथ यत्प्रथमोदिते स प्रस्तावस्तदस्य मनुष्या३ अन्वायत्तास्तस्मात्ते प्रस्तुतिकामाः प्रशꣳसाकामाः प्रस्तावभाजिनो ह्येतस्य साम्नः ॥ ३ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अथ यत् प्रथमोदिते [भवति], सः प्रस्तावः [अस्ति] । अस्य मनुष्याः तत् अन्वायत्ताः [सन्ति] । तस्मात् ते प्रस्तुतिकामाः प्रशंसाकामाः [सन्ति]; हि एतस्य साम्नः प्रस्तावभाजिनः [सन्ति] ।
हिन्दी अर्थ
सूर्य के पहले-पहल उदित होने की अवस्था प्रस्ताव है। उससे मनुष्य सम्बद्ध हैं; इसलिए वे प्रस्तुति और प्रशंसा चाहते हैं, क्योंकि वे इस साम के प्रस्ताव में भागी हैं।
English meaning
The sun’s first rising is prastāva. Human beings are connected with it; therefore they desire commendation and praise, for they share in the prastāva of this Sāman.
व्याख्या
प्रस्तुति और प्रस्ताव की ध्वनि-संगति मानवीय प्रशंसा-इच्छा से जोड़ी गई है। मनुष्या३ में ३ उच्चारण-चिह्न है, संख्या तीन नहीं।
Explanation
The sound association between prastuti and prastāva is connected with the desire for praise. The ३ in मनुष्या३ marks vocal duration, not three people.
संदर्भ
सूर्य की दैनिक गति को सात अंगों वाला साम माना गया है। दिन की प्रत्येक अवस्था के साथ जीवों का एक वर्ग सम्बद्ध किया जाता है।
Context
The sun’s daily course is contemplated as a seven-part Sāman. Each phase of the day is linked with a class of beings.