Passage 22.7
अथ यदूर्ध्वमपराह्णात्प्रागस्तमयात्स उपद्रवस्तदस्यारण्या अन्वायत्तास्तस्मात्ते पुरुषं दृष्ट्वा कक्षꣳ श्वभ्रमित्युपद्रवन्त्युपद्रवभाजिनो ह्येतस्य साम्नः ॥ ७ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अथ यत् अपराह्णात् ऊर्ध्वम् अस्तमयात् प्राक् [भवति], सः उपद्रवः [अस्ति] । अस्य आरण्याः तत् अन्वायत्ताः [सन्ति] । तस्मात् ते पुरुषम् दृष्ट्वा कक्षम् श्वभ्रम् इति उपद्रवन्ति; हि एतस्य साम्नः उपद्रवभाजिनः [सन्ति] ।
हिन्दी अर्थ
अपराह्न के बाद और अस्त से पहले की अवस्था उपद्रव है। उससे वन्य जीव सम्बद्ध हैं; इसलिए मनुष्य को देखकर वे झाड़ियों या गड्ढे की ओर भागते हैं, क्योंकि वे इस साम के उपद्रव में भागी हैं।
English meaning
The interval after the afternoon and before sunset is upadrava. Wild creatures are connected with it; therefore, on seeing a human being, they run toward a thicket or hollow, for they share in the upadrava of this Sāman.
व्याख्या
यहाँ उपद्रवन्ति का अर्थ आश्रय की ओर दौड़ना है। कक्ष झाड़ीदार स्थान और श्वभ्र गड्ढा या खोखला स्थान है।
Explanation
Upadravanti here means running toward shelter. Kakṣa is a thicket, while śvabhra denotes a pit or hollow.
संदर्भ
सूर्य की दैनिक गति को सात अंगों वाला साम माना गया है। दिन की प्रत्येक अवस्था के साथ जीवों का एक वर्ग सम्बद्ध किया जाता है।
Context
The sun’s daily course is contemplated as a seven-part Sāman. Each phase of the day is linked with a class of beings.