Passage 11.4
अथ हैनं प्रस्तोतोपससाद प्रस्तोतर्या देवता प्रस्तावमन्वायत्ता तां चेदविद्वान्प्रस्तोष्यसि मूर्धा ते विपतिष्यतीति मा भगवानवोचत्कतमा सा देवतेति ॥ ४ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अथ ह प्रस्तोता एनम् उपससाद-प्रस्तोतर्, या देवता प्रस्तावम् अन्वायत्ता [अस्ति], ताम् अविद्वान् चेत् प्रस्तोष्यसि, ते मूर्धा विपतिष्यति इति भगवान् मा अवोचत् । सा देवता कतमा [अस्ति] इति ।
हिन्दी अर्थ
तब प्रस्तोता उनके पास आया और बोला, “आपने मुझसे कहा था, ‘प्रस्तोता! प्रस्ताव से सम्बद्ध देवता को जाने बिना यदि तुम प्रस्ताव गाओगे, तो तुम्हारा सिर गिर पड़ेगा।’ वह देवता कौन है?”
English meaning
Then the prastotṛ approached him and said, “You told me, ‘Prastotṛ! If you sing the prastāva without knowing its associated deity, your head will fall off.’ Which deity is that?”
व्याख्या
प्रस्तोता उषस्ति के वचन को उद्धृत करता है; इस बार सिर गिरने की बात नई धमकी नहीं, पहले कही बात का स्मरण है। कतमा सा देवता प्रश्न का केन्द्र है। कथा का अगला कदम भय बनाए रखना नहीं बल्कि प्रस्ताव के ध्यान-विषय का ज्ञान देना है।
Explanation
The prastotṛ is quoting Uṣasti: the falling-head statement is a recollection, not a new threat. Katamā sā devatā, “which deity is that?”, is the central question. The narrative’s next step is to supply the contemplative meaning of the prastāva rather than leave the singer in fear.
संदर्भ
अनुमति की व्यवस्था हो जाने पर पहला गायक अपने अधूरे ज्ञान को पूरा करने आता है। वह चेतावनी को ठीक उसी विषय के प्रश्न में बदल देता है जिसे वह नहीं जानता।
Context
Once the arrangement is settled, the first singer comes to fill the gap in his knowledge. He turns the warning into a precise question about what he does not know.