Passage 98.7
न वै नूनं भगवन्तस्त एतदवेदिषुर्यद्ध्येतदवेदिष्यन्कथं मे नावक्ष्यन्निति भगवाँस्त्वेव मे तद्ब्रवीत्विति तथा सोम्येति होवाच ॥ ७ ॥
पदच्छेद
अन्वय
ते भगवन्तः एतत् न वै नूनम् अवेदिषुः; यत् हि एतत् अवेदिष्यन्, कथम् मे न अवक्ष्यन् इति [सः उवाच] । भगवान् तु एव मे तत् ब्रवीतु इति [सः उवाच] । [पिता], तथा, सोम्य इति ह उवाच ।
हिन्दी अर्थ
श्वेतकेतु बोला, “निश्चय ही वे आदरणीय गुरु इसे नहीं जानते थे। यदि जानते होते, तो मुझे क्यों न बताते? अब आप ही मुझे वह बताइए।” पिता ने कहा, “ऐसा ही होगा, प्रिय।”
English meaning
Śvetaketu said, “Surely those honored teachers did not know this. If they had known it, why would they not have told me? Please, sir, you yourself tell me.” His father replied, “So I shall, my dear.”
व्याख्या
गुरुओं के न जानने का कथन श्वेतकेतु का अनुमान है, संपादक का ऐतिहासिक निष्कर्ष नहीं। उत्तर में पिता शिक्षण के लिए सहमत होते हैं; संवाद में अधिकार के साथ स्नेह भी बना रहता है।
Explanation
The claim that the teachers did not know is Śvetaketu’s inference, not an editorial historical finding. His father agrees to teach, preserving the dialogue’s combination of authority and affection.
संदर्भ
पुत्र अब पिता से सीधे उस शिक्षा का अनुरोध करता है।
Context
The son now asks his father directly for this teaching.