Passage 98.6
यथा सोम्यैकेन नखनिकृन्तनेन सर्वं कार्ष्णायसं विज्ञातँ स्याद्वाचारम्भणं विकारो नामधेयं कृष्णायसमित्येव सत्यमेवँसोम्य स आदेशो भवतीति ॥ ६ ॥
पदच्छेद
अन्वय
सोम्य, यथा एकेन नखनिकृन्तनेन सर्वम् कार्ष्णायसम् विज्ञातम् स्यात्; विकारः वाचारम्भणम् नामधेयम् [अस्ति]; कृष्णायसम् इति एव सत्यम् [अस्ति] । सोम्य, सः आदेशः एवम् भवति इति ।
हिन्दी अर्थ
“प्रिय, जैसे एक नाखून काटने वाले औजार से काले लोहे की बनी सभी वस्तुओं को जाना जा सकता है: विकार वाणी पर आश्रित केवल एक नाम है; काला लोहा ही वास्तविक आधार है। प्रिय, वह उपदेश इस प्रकार का है।”
English meaning
“My dear, just as through one nail-cutting implement everything made of dark iron can be understood: a modification is a name dependent on speech; dark iron alone is the underlying reality. My dear, that is the kind of instruction it is.”
व्याख्या
नखनिकृन्तन नाखून काटने का औजार है, किसी विशेष आधुनिक बनावट का नेल-कटर अनिवार्य नहीं। कृष्णायस और कार्ष्णायस काले लौह पदार्थ तथा उससे बनी वस्तु के भेद को रखते हैं।
Explanation
The nail-cutting implement need not have the design of a modern nail clipper. Kṛṣṇāyasa names dark iron, while kārṣṇāyasa denotes something made from it.
संदर्भ
तीसरा पदार्थ-दृष्टान्त पिता के प्रारम्भिक प्रश्न का उत्तर पूरा करता है।
Context
The third material comparison completes the initial answer to the father’s question.