Passage 76.7
तँ ह चिरं वसेत्याज्ञापयाञ्चकार तँ होवाच यथा मा त्वं गौतमावदो यथेयं न प्राक्त्वत्तः पुरा विद्या ब्राह्मणान्गच्छति तस्मादु सर्वेषु लोकेषु क्षत्रस्यैव प्रशासनमभूदिति तस्मै होवाच ॥ ७ ॥
पदच्छेद
अन्वय
[राजा] तम् ह चिरम् वस इति आज्ञापयाञ्चकार । तम् ह उवाच—गौतम, यथा मा त्वम् अवदः, [तथा त्वम् जानीहि], यथा इयम् विद्या प्राक् त्वत्तः पुरा ब्राह्मणान् न गच्छति । तस्मात् उ सर्वेषु लोकेषु क्षत्रस्य एव प्रशासनम् अभूत् इति । [राजा] तस्मै ह उवाच ।
हिन्दी अर्थ
राजा ने उन्हें आदेश दिया, “बहुत समय यहाँ रहिए।” फिर कहा, “गौतम, जैसा आपने मुझसे कहा, उससे स्पष्ट है कि आपसे पहले यह विद्या ब्राह्मणों तक नहीं पहुँची थी। इसी कारण सभी लोकों में शासन क्षत्रिय वर्ग का ही रहा।” फिर उन्होंने उन्हें शिक्षा दी।
English meaning
The king instructed him, “Stay here for a long time.” He then said, “Gautama, as your words to me show, before you this knowledge had not reached the Brahmins. For that reason rulership in all the worlds belonged to the royal class.” He then taught him.
व्याख्या
यह राजा द्वारा प्रस्तुत सामाजिक और वंशगत अधिकार का दावा है। इसे सभी युगों के इतिहास का सत्यापन या आज किसी जन्माधारित वर्ग के शासन का औचित्य नहीं माना गया है। दीर्घ निवास शिक्षार्थी की तैयारी को रेखांकित करता है।
Explanation
This is the king’s claim about social and hereditary authority. It is not a verified history of all ages or a justification of birth-based political privilege today. The extended stay emphasizes the learner’s preparation.
संदर्भ
शिक्षा का प्रारम्भ राजन्य परम्परा से ब्राह्मण शिष्य तक उसके हस्तान्तरण के कथन से होता है।
Context
The teaching begins with an account of its transmission from a royal tradition to a Brahmin student.