Passage 76.6
स ह गौतमो राज्ञोऽर्धमेयाय तस्मै ह प्राप्तायार्हाञ्चकार स ह प्रातः सभाग उदेयाय तँ होवाच मानुषस्य भगवन्गौतम वित्तस्य वरं वृणीथा इति स होवाच तवैव राजन्मानुषं वित्तं यामेव कुमारस्यान्ते वाचमभाषथास्तामेव मे ब्रूहीति स ह कृच्छ्री बभूव ॥ ६ ॥
पदच्छेद
अन्वय
सः ह गौतमः राज्ञः अर्धम् एयाय । [राजा] तस्मै ह प्राप्ताय अर्हाम् चकार । सः ह प्रातः सभागः उदेयाय । [राजा] तम् ह उवाच—भगवन् गौतम, मानुषस्य वित्तस्य वरम् वृणीथाः इति । सः ह उवाच—राजन्, मानुषम् वित्तम् तव एव [तिष्ठतु] । कुमारस्य अन्ते याम् एव वाचम् अभाषथाः, ताम् एव मे ब्रूहि इति । सः [राजा] ह कृच्छ्री बभूव ।
हिन्दी अर्थ
गौतम राजा के पास गए। राजा ने आए हुए अतिथि का सम्मान किया। अगले प्रातः गौतम सभा में उपस्थित हुए। राजा ने कहा, “भगवन् गौतम, मानवीय धन में से कोई वर चुनिए।” उन्होंने कहा, “राजन्, मानवीय धन आपका ही रहे। आपने मेरे पुत्र के सामने जो बात कही थी, वही मुझे बताइए।” तब राजा असमंजस में पड़ गए।
English meaning
Gautama went to the king, who honored him on arrival. The next morning Gautama appeared in the assembly. The king said, “Revered Gautama, choose a gift of human wealth.” He replied, “Let human wealth remain yours, king. Tell me the very matter you spoke of in my son’s presence.” The king then became troubled.
व्याख्या
गौतम यहाँ आरुणि का गोत्रनाम है। कुमारस्य अन्ते का अर्थ पुत्र के सामने है। कृच्छ्री बभूव कठिनाई या असुविधा बताता है; उसका कारण अगले पद में शिक्षा की सामाजिक परम्परा से जुड़ता है।
Explanation
Gautama is Āruṇi’s lineage name here. “At the boy’s side” means in his presence. The king’s difficulty will be linked to the social history of the teaching in the next passage.
संदर्भ
गौतम धन के प्रस्ताव को छोड़कर अपने पुत्र से पूछे गए ज्ञान की माँग करते हैं।
Context
Gautama declines the offer of wealth and requests the knowledge raised with his son.