Passage 57.8
सोऽधस्ताच्छकटस्य पामानं कषमाणमुपोपविवेश तꣳ हाभ्युवाद त्वं नु भगवः सयुग्वा रैक्व इत्यहꣳ ह्यरा३ इति ह प्रतिजज्ञे स ह क्षत्ताविदमिति प्रत्येयाय ॥ ८ ॥
पदच्छेद
अन्वय
सः शकटस्य अधस्तात् पामानम् कषमाणम् [रैक्वम्] उपोपविवेश । तम् ह अभ्युवाद—भगवः, त्वम् नु सयुग्वा रैक्वः [असि] इति । अहम् हि अरा३ [सयुग्वा रैक्वः अस्मि] इति [रैक्वः] ह प्रतिजज्ञे । सः ह क्षत्ता अविदम् इति प्रत्येयाय ।
हिन्दी अर्थ
परिचारक एक गाड़ी के नीचे अपनी खुजली खुजलाते हुए व्यक्ति के पास जा बैठा। उसने पूछा: “भगवन्, क्या आप ही गाड़ीवाले रैक्व हैं?” उसने स्वीकार किया: “हाँ रे, मैं ही हूँ।” परिचारक लौटकर बोला: “मुझे वह मिल गया।”
English meaning
The attendant approached and sat beside a man under a cart, scratching an itch. He asked, “Sir, are you Raikva with the cart?” The man acknowledged, “Yes indeed, I am.” The attendant returned and said, “I found him.”
व्याख्या
पामा त्वचा की खुजली या खुजलीदार अवस्था है; पाठ कोई आधुनिक चिकित्सकीय निदान नहीं करता। अरा३ में ३ लम्बे उच्चारण का संकेत है, मन्त्र की अलग संख्या नहीं। ज्ञान और बाहरी वैभव के अन्तर को दृश्य स्पष्ट करता है।
Explanation
Pāman denotes an itch or itchy skin condition, not a modern clinical diagnosis. The ३ in the prolonged call अरा३ is a recitational length sign, not a separate verse number. The scene contrasts knowledge with outward prestige.
संदर्भ
खोज एक अत्यन्त साधारण दिखने वाले व्यक्ति तक पहुँचती है, जिसका परिचय गाड़ी से जुड़ा है।
Context
The search reaches a conspicuously unassuming man whose identity is associated with a cart.