Passage 52.6
अथ यदवोचं भुवः प्रपद्य इत्यग्निं प्रपद्ये वायुं प्रपद्य आदित्यं प्रपद्य इत्येव तदवोचम् ॥ ६ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अथ भुवः प्रपद्ये इति यत् अवोचम्, अग्निम् प्रपद्ये, वायुम् प्रपद्ये, आदित्यम् प्रपद्ये इति एव तत् अवोचम् ।
हिन्दी अर्थ
मैंने जो कहा, “मैं भुवः की शरण लेता हूँ”, उससे मैंने यही कहा: मैं अग्नि की शरण लेता हूँ, वायु की शरण लेता हूँ और आदित्य की शरण लेता हूँ।
English meaning
When I said, “I take refuge in Bhuvaḥ,” I said precisely this: I take refuge in fire, in wind, and in the sun.
व्याख्या
अग्नि, वायु और आदित्य का क्रम पिछले पृथ्वी, अन्तरिक्ष और द्युलोक के क्रम से मेल खाता है। यहाँ भुवः को केवल मध्यलोक का नाम कहना अपूर्ण होगा, क्योंकि पूरा देवता-त्रिक उसका व्याख्यात अर्थ है।
Explanation
Fire, wind and sun correspond in order to the preceding earth, intervening space and heaven. Bhuvaḥ here cannot be reduced to the middle world alone, since the entire triad of deities is its stated meaning.
संदर्भ
दूसरी व्याहृति, भुवः, तीन देवतामय शक्तियों के आश्रय के रूप में खोली जाती है।
Context
The second sacred utterance, Bhuvaḥ, is unfolded as refuge in three divine powers.