Passage 52.3
अरिष्टं कोशं प्रपद्येऽमुनामुनामुना प्राणं प्रपद्येऽमुनामुनामुना भूः प्रपद्येऽमुनामुनामुना भुवः प्रपद्येऽमुनामुनामुना स्वः प्रपद्येऽमुनामुनामुना ॥ ३ ॥
पदच्छेद
अन्वय
[अहम्] अरिष्टम् कोशम् प्रपद्ये [पुत्रायुषे]; अमुना अमुना अमुना [इति पुत्रस्य नाम त्रिः गृह्णाति] । [अहम्] प्राणम् प्रपद्ये; अमुना अमुना अमुना [इति पुत्रस्य नाम त्रिः गृह्णाति] । [अहम्] भूः प्रपद्ये; अमुना अमुना अमुना [इति पुत्रस्य नाम त्रिः गृह्णाति] । [अहम्] भुवः प्रपद्ये; अमुना अमुना अमुना [इति पुत्रस्य नाम त्रिः गृह्णाति] । [अहम्] स्वः प्रपद्ये; अमुना अमुना अमुना [इति पुत्रस्य नाम त्रिः गृह्णाति] ।
हिन्दी अर्थ
मैं उस अक्षत कोश की शरण लेता हूँ: अमुक, अमुक, अमुक के लिए। मैं प्राण की शरण लेता हूँ: अमुक, अमुक, अमुक के लिए। मैं भूः की शरण लेता हूँ: अमुक, अमुक, अमुक के लिए। मैं भुवः की शरण लेता हूँ: अमुक, अमुक, अमुक के लिए। मैं स्वः की शरण लेता हूँ: अमुक, अमुक, अमुक के लिए।
English meaning
I take refuge in the unharmed receptacle: for so-and-so, so-and-so, so-and-so. I take refuge in the life-breath: for so-and-so, so-and-so, so-and-so. I take refuge in Bhūḥ: for so-and-so, so-and-so, so-and-so. I take refuge in Bhuvaḥ: for so-and-so, so-and-so, so-and-so. I take refuge in Svaḥ: for so-and-so, so-and-so, so-and-so.
व्याख्या
अमुना नाम की जगह प्रयुक्त निर्देश है। शाङ्करभाष्य इसे पुत्र का नाम तीन बार लेने के रूप में समझाता है; “के लिए” उसी प्रयोजन का अनुवाद है, तृतीया का शाब्दिक एकमात्र अर्थ नहीं। पाँचों आश्रयों के बाद तीन बार नाम लेने का क्रम पूरा सुरक्षित है। भूः, भुवः और स्वः की अपनी व्याख्या अगले वाक्यों में आएगी।
Explanation
Amunā is a name placeholder. Śaṅkara reads it as repeating the son’s name three times; “for” conveys that ritual purpose, not the only literal meaning of the instrumental case. All five refuges and all fifteen placeholders are retained. The three sacred utterances are explained in the following units.
संदर्भ
पुत्रशोक से रक्षा की इच्छा अब पाँच आश्रयों के मन्त्र में व्यक्त होती है।
Context
The wish for protection from grief over a son becomes a formula invoking five refuges.