Sunday Meditation· Open to Everyone

अध्याय 3, खण्ड 15

संस्कृत

Passage 52.3

अरिष्टं कोशं प्रपद्येऽमुनामुनामुना प्राणं प्रपद्येऽमुनामुनामुना भूः प्रपद्येऽमुनामुनामुना भुवः प्रपद्येऽमुनामुनामुना स्वः प्रपद्येऽमुनामुनामुना ॥ ३ ॥

पदच्छेद

अरिष्टम्ariṣṭamकोशम्kośamप्रपद्येprapadyeअमुनाamunāअमुनाamunāअमुनाamunāप्राणम्prāṇamप्रपद्येprapadyeअमुनाamunāअमुनाamunāअमुनाamunāभूःbhūḥप्रपद्येprapadyeअमुनाamunāअमुनाamunāअमुनाamunāभुवःbhuvaḥप्रपद्येprapadyeअमुनाamunāअमुनाamunāअमुनाamunāस्वःsvaḥप्रपद्येprapadyeअमुनाamunāअमुनाamunāअमुनाamunā

अन्वय

[अहम्] अरिष्टम् कोशम् प्रपद्ये [पुत्रायुषे]; अमुना अमुना अमुना [इति पुत्रस्य नाम त्रिः गृह्णाति] । [अहम्] प्राणम् प्रपद्ये; अमुना अमुना अमुना [इति पुत्रस्य नाम त्रिः गृह्णाति] । [अहम्] भूः प्रपद्ये; अमुना अमुना अमुना [इति पुत्रस्य नाम त्रिः गृह्णाति] । [अहम्] भुवः प्रपद्ये; अमुना अमुना अमुना [इति पुत्रस्य नाम त्रिः गृह्णाति] । [अहम्] स्वः प्रपद्ये; अमुना अमुना अमुना [इति पुत्रस्य नाम त्रिः गृह्णाति] ।

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