Passage 105.6
तस्य क्व मूलँ स्यादन्यत्राद्भ्योऽद्भिः सोम्य शुङ्गेन तेजो मूलमन्विच्छ तेजसा सोम्य शुङ्गेन सन्मूलमन्विच्छ सन्मूलाः सोम्येमाः सर्वाः प्रजाः सदायतनाः सत्प्रतिष्ठा यथा नु खलु सोम्येमास्तिस्रो देवताः पुरुषं प्राप्य त्रिवृत्त्रिवृदेकैका भवति तदुक्तं पुरस्तादेव भवत्यस्य सोम्य पुरुषस्य प्रयतो वाङ्मनसि सम्पद्यते मनः प्राणे प्राणस्तेजसि तेजः परस्यां देवतायाम् ॥ ६ ॥
पदच्छेद
अन्वय
तस्य मूलम् अद्भ्यः अन्यत्र क्व स्यात् । सोम्य, अद्भिः शुङ्गेन तेजः मूलम् अन्विच्छ; सोम्य, तेजसा शुङ्गेन सन्मूलम् अन्विच्छ । सोम्य, इमाः सर्वाः प्रजाः सन्मूलाः सदायतनाः सत्प्रतिष्ठाः [सन्ति] । यथा नु खलु सोम्य इमाः तिस्रः देवताः पुरुषम् प्राप्य एकैका त्रिवृत् त्रिवृत् भवति, तत् पुरस्तात् एव उक्तम् भवति । सोम्य, प्रयतः अस्य पुरुषस्य वाक् मनसि सम्पद्यते; मनः प्राणे [सम्पद्यते]; प्राणः तेजसि [सम्पद्यते]; तेजः परस्याम् देवतायाम् [सम्पद्यते] ।
हिन्दी अर्थ
“उसकी जड़ जल के सिवा और कहाँ होगी? प्रिय, जल को अंकुर मानकर तेज को उसकी जड़ खोजो; तेज को अंकुर मानकर सत् को उसकी जड़ खोजो। प्रिय, ये सभी प्रजाएँ सत् में जड़ रखती हैं, सत् को आश्रय रखती हैं और सत् में प्रतिष्ठित हैं। ये तीन देवता मनुष्य तक पहुँचकर किस तरह प्रत्येक तीन-तीन होते हैं, यह पहले ही कहा गया है। प्रिय, इस मनुष्य के प्रस्थान करते समय वाणी मन में मिलती है, मन प्राण में, प्राण तेज में और तेज परम देवता में।”
English meaning
“Where could its root be other than water? My dear, taking water as the shoot, seek heat as its root; taking heat as the shoot, seek Being as its root. All these creatures are rooted in Being, have Being as their abode, and are established in Being. How these three deities each become threefold on reaching a person has already been explained. My dear, when this person departs, speech merges into mind, mind into vital breath, vital breath into heat, and heat into the highest deity.”
व्याख्या
प्रयतः यहाँ प्रस्थान कर रहे, अर्थात् मृत्यु के निकट व्यक्ति को बताता है। विलय के चार चरण उसी ऐतिहासिक तत्त्व-व्यवस्था में हैं। परम देवता का सम्बन्ध पहले बताए सत् से है; किसी अलग देव-नाम को अनुवाद में नहीं जोड़ा गया।
Explanation
Prayataḥ describes one departing, here approaching death. The four stages of merging belong to the same ancient elemental account. The highest deity connects with the preceding Being; no additional divine name is inserted.
संदर्भ
प्यास की कारण-श्रृंखला शरीर के प्रस्थान और परम आधार में वापसी तक बढ़ती है।
Context
The account of thirst’s causal sequence expands into bodily departure and return to the highest ground.