Passage 151.6
तं वा एतं देवा आत्मानमुपासते तस्मात्तेषाꣳ सर्वे च लोका आत्ताः सर्वे च कामाः स सर्वाꣳश्च लोकानाप्नोति सर्वाꣳश्च कामान्यस्तमात्मानमनुविद्य विजानातीति ह प्रजापतिरुवाच प्रजापतिरुवाच ॥ ६ ॥
पदच्छेद
अन्वय
देवाः तम् वै एतम् आत्मानम् उपासते । तस्मात् तेषाम् सर्वे च लोकाः सर्वे च कामाः आत्ताः [सन्ति] । यः तम् आत्मानम् अनुविद्य विजानाति, सः सर्वान् च लोकान् सर्वान् च कामान् आप्नोति इति ह प्रजापतिः उवाच; प्रजापतिः उवाच ।
हिन्दी अर्थ
“देव इसी आत्मा की उपासना करते हैं। इसलिए सभी लोक और सभी काम्य वस्तुएँ उन्हें प्राप्त हैं। जो इस आत्मा को खोजकर जानता है, वह सभी लोकों और सभी काम्य वस्तुओं को प्राप्त करता है।” ऐसा प्रजापति ने कहा; प्रजापति ने कहा।
English meaning
“The gods contemplate this very self. Therefore all worlds and all objects of desire are theirs. Whoever discovers and knows this self obtains all worlds and all objects of desire.” So Prajāpati said; Prajāpati said.
व्याख्या
देवों की उपासना और किसी भी जानने वाले की प्राप्ति अलग वाक्य हैं। प्रजापति ने कहा का दोहरा समापन मूल की शैली है, हटाने योग्य प्रतिलिपि-दोष नहीं। सभी लोक और कामनाएँ पाठ का फलवचन हैं।
Explanation
The gods’ contemplation and the attainment of whoever knows are separate statements. The doubled “Prajāpati said” is a closing formula, not a copying error to remove. All worlds and desires remain the text’s promised result.
संदर्भ
प्रजापति का संवाद प्रारम्भिक प्रतिज्ञा पर लौटकर समाप्त होता है।
Context
Prajāpati’s dialogue closes by returning to its opening promise.