Passage 151.3
एवमेवैष संप्रसादोऽस्माच्छरीरात्समुत्थाय परं ज्योतिरुपसंपद्य स्वेन रूपेणाभिनिष्पद्यते स उत्तमपुरुषः स तत्र पर्येति जक्षत्क्रीडन्रममाणः स्त्रीभिर्वा यानैर्वा ज्ञातिभिर्वा नोपजनꣳ स्मरन्निदꣳ शरीरꣳ स यथा प्रयोग्य आचरणे युक्त एवमेवायमस्मिञ्छरीरे प्राणो युक्तः ॥ ३ ॥
पदच्छेद
अन्वय
एवम् एव एषः सम्प्रसादः अस्मात् शरीरात् समुत्थाय परम् ज्योतिः उपसम्पद्य स्वेन रूपेण अभिनिष्पद्यते । सः उत्तमपुरुषः [अस्ति] । सः तत्र जक्षत् क्रीडन् स्त्रीभिः वा यानैः वा ज्ञातिभिः वा रममाणः इदम् उपजनम् शरीरम् न स्मरन् पर्येति । सः यथा प्रयोग्यः आचरणे युक्तः [अस्ति], एवम् एव अयम् प्राणः अस्मिन् शरीरे युक्तः [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
“इसी प्रकार यह शान्त सत्ता इस शरीर से उठकर परम ज्योति को प्राप्त होती है और अपने ही स्वरूप में प्रकट होती है। वही उत्तम पुरुष है। वहाँ वह हँसता, खेलता और आनन्द लेता हुआ विचरता है, स्त्रियों के साथ, वाहनों में या अपने सम्बन्धियों के साथ; इस जन्म से बने शरीर को याद नहीं करता। जैसे कोई वाहक पशु गाड़ी में जोता हुआ होता है, वैसे ही यह प्राण इस शरीर में जुड़ा हुआ है।”
English meaning
“In the same way, this serene being rises from the body, reaches the highest light, and becomes manifest in its own form. That is the highest person. There he moves about laughing, playing, and enjoying himself, with women, with vehicles, or with his relatives, without remembering this body produced by birth. Just as a draught animal is harnessed to a carriage, so this vital breath is harnessed to the body.”
व्याख्या
जक्षत् का अर्थ हँसना या खाना, दोनों लिया गया है; यहाँ हँसना चुना गया है। स्त्रियाँ, वाहन और सम्बन्धी सभी मूल में हैं; यह पुरुष-केन्द्रित आनन्द-चित्र है, दूसरों पर अधिकार का समर्थन नहीं। प्राण को जुते पशु से तुलना द्वारा देह-क्रिया का साधन बताया गया है।
Explanation
Jakṣat can be interpreted as laughing or eating; laughing is chosen here. Women, vehicles, and relatives all occur in the source. This is male-centered imagery of delight, not endorsement of control over others. The draught-animal analogy presents vital breath as the body’s operative support.
संदर्भ
दृष्टान्त के बाद आत्मा का स्वस्वरूप और शरीर से उसका सम्बन्ध बताया जाता है।
Context
After the analogy comes the self’s own form and its relation to the body.