Passage 151.2
अशरीरो वायुरभ्रं विद्युत्स्तनयित्नुरशरीराण्येतानि तद्यथैतान्यमुष्मादाकाशात्समुत्थाय परं ज्योतिरुपसंपद्य स्वेन रूपेणाभिनिष्पद्यन्ते ॥ २ ॥
पदच्छेद
अन्वय
वायुः अशरीरः [अस्ति] । अभ्रम् विद्युत् स्तनयित्नुः—एतानि अशरीराणि [सन्ति] । तत् यथा एतानि अमुष्मात् आकाशात् समुत्थाय परम् ज्योतिः उपसम्पद्य स्वेन रूपेण अभिनिष्पद्यन्ते ।
हिन्दी अर्थ
“वायु अशरीर है; बादल, बिजली और गर्जन भी अशरीर हैं। जैसे ये उस आकाश से उठकर परम ज्योति को प्राप्त होते हैं और अपने-अपने स्वरूप में प्रकट होते हैं।”
English meaning
“Wind is bodiless; cloud, lightning, and thunder are also bodiless. They rise from that space, reach the highest light, and become manifest in their own forms.”
व्याख्या
यहाँ अशरीर का अर्थ मनुष्य जैसे अंगों वाला ठोस शरीर न होना हो सकता है; इससे वायु या बादल का भौतिक अस्तित्व नकारा नहीं जाता। परम ज्योति का दृष्टान्तगत सम्बन्ध सूर्य से भी समझा गया है। अगले अनुच्छेद में यह तुलना आत्मा पर लागू होती है।
Explanation
Bodiless here can mean lacking a solid, articulated body like a human body; it does not deny the physical existence of wind or clouds. The highest light in the analogy has also been related to the sun. The next unit applies the comparison to the self.
संदर्भ
वायु और आकाशीय घटनाएँ अपने स्वरूप में प्रकट होने का दृष्टान्त देती हैं।
Context
Wind and atmospheric phenomena illustrate manifestation in their own forms.