Passage 140.3
यावान्वा अयमाकाशस्तावानेषोऽन्तर्हृदय आकाश उभे अस्मिन्द्यावापृथिवी अन्तरेव समाहिते उभावग्निश्च वायुश्च सूर्याचन्द्रमसावुभौ विद्युन्नक्षत्राणि यच्चास्येहास्ति यच्च नास्ति सर्वं तदस्मिन्समाहितमिति ॥ ३ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अयम् आकाशः यावान् वा [अस्ति], एषः अन्तर्हृदये आकाशः तावान् [अस्ति] । अस्मिन् उभे द्यावापृथिवी अन्तः एव समाहिते [स्तः]; उभौ अग्निः च वायुः च, उभौ सूर्याचन्द्रमसौ, विद्युत् नक्षत्राणि [च समाहितानि सन्ति] । यत् च अस्य इह अस्ति, यत् च न अस्ति, तत् सर्वम् अस्मिन् समाहितम् [अस्ति] इति ।
हिन्दी अर्थ
“यह बाहरी आकाश जितना विशाल है, हृदय के भीतर का आकाश भी उतना ही है। उसमें द्युलोक और पृथिवी दोनों भीतर ही समाहित हैं; अग्नि और वायु दोनों, सूर्य और चन्द्रमा दोनों, बिजली और नक्षत्र भी। इस व्यक्ति का जो कुछ यहाँ है और जो यहाँ नहीं है, वह सब उसमें समाहित है।”
English meaning
“As vast as this space outside is the space within the heart. Heaven and earth are both contained within it, as are fire and wind, sun and moon, lightning and the stars. Everything that this person has here, and everything that he does not have here, is contained in it.”
व्याख्या
द्यावा-पृथिवी, अग्नि-वायु और सूर्य-चन्द्र की जोड़ियाँ तथा बिजली-नक्षत्र अलग-अलग रखे गए हैं। यह ध्यानात्मक विश्व-सम्बन्ध है, हृदय की शारीरिक गुहा के वैज्ञानिक माप का दावा नहीं।
Explanation
The paired heaven-earth, fire-wind, and sun-moon, together with lightning and stars, remain distinct. This is a contemplative correspondence with the cosmos, not a scientific measurement of the anatomical heart.
संदर्भ
उत्तर बाहरी विस्तार और हृदय के आकाश को साथ रखता है।
Context
The answer places the expanse outside beside the space of the heart.