Passage 104.3
तँ होवाच यथा सोम्य महतोऽभ्याहितस्यैकोऽङ्गारः खद्योतमात्रः परिशिष्टः स्यात्तेन ततोऽपि न बहु दहेदेवँसोम्य ते षोडशानां कलानामेका कलातिशिष्टा स्यात्तयैतर्हि वेदान्नानुभवस्यशानाथ मे विज्ञास्यसीति ॥ ३ ॥
पदच्छेद
अन्वय
[पिता] तम् ह उवाच—सोम्य, यथा महतः अभ्याहितस्य [अग्नेः] एकः खद्योतमात्रः अङ्गारः परिशिष्टः स्यात्, तेन ततः अपि बहु न दहेत्, एवम् सोम्य ते षोडशानाम् कलानाम् एका कला अतिशिष्टा स्यात् । तया एतर्हि [त्वम्] वेदान् न अनुभवसि । अशान; अथ मे [वचनात्] विज्ञास्यसि इति ।
हिन्दी अर्थ
उन्होंने उससे कहा, “प्रिय, जैसे बहुत बड़ी प्रज्वलित अग्नि में से केवल जुगनू जितना एक अंगारा बचा हो, तो उससे आगे बहुत कुछ न जल सके; वैसे ही तुम्हारी सोलह कलाओं में से एक ही कला बची है। उसके सहारे इस समय तुम वेदों को स्मरण नहीं कर पा रहे हो। अन्न खाओ; तब मेरी बात समझोगे।”
English meaning
He said to him, “My dear, suppose that from a great, well-fed fire only one ember the size of a firefly remained: it could not burn much more. In the same way, one of your sixteen parts is left, and with it you cannot now recall the Vedas. Eat, and then you will understand what I mean.”
व्याख्या
अग्नि मूल वाक्य में निहित है, अंगारे और अभ्याहित के प्रसंग से समझी जाती है। जुगनू का आकार, सोलह में एक कला और अन्न खाने का निर्देश सभी उपमा के महत्त्वपूर्ण भाग हैं।
Explanation
The fire is implicit in the Sanskrit and supplied from the ember and fuel context. The firefly’s size, one remaining part out of sixteen, and the instruction to eat are all essential parts of the comparison.
संदर्भ
एक बचे अंगारे का उदाहरण क्षीण स्मरण-शक्ति को समझाता है।
Context
The single remaining ember illustrates diminished ability to recall.