Passage 101.7
यद्वविज्ञातमिवाभूदित्येतासामेव देवतानाँसमास इति तद्विदाञ्चक्रुर्यथा नु खलु सोम्येमास्तिस्रो देवताः पुरुषं प्राप्य त्रिवृत्त्रिवृदेकैका भवति तन्मे विजानीहीति ॥ ७ ॥
पदच्छेद
अन्वय
यत् उ अविज्ञातम् इव अभूत् इति [गृहीतम्], [तत्] एतासाम् एव देवतानाम् समासः इति तत् [ते] विदाञ्चक्रुः । सोम्य, यथा नु खलु इमाः तिस्रः देवताः पुरुषम् प्राप्य एकैका त्रिवृत् त्रिवृत् भवति, तत् मे [निगदतः] विजानीहि इति ।
हिन्दी अर्थ
“और जो कुछ अपरिचित-सा था, उसे उन्होंने ‘यह इन्हीं देवताओं का सम्मिश्रण है’ जान लिया। प्रिय, अब मुझसे समझो कि ये तीन देवता मनुष्य तक पहुँचकर किस तरह प्रत्येक तीन-तीन के रूप में होते हैं।”
English meaning
“Whatever seemed unrecognized, they understood as a combination of these very deities. Now, my dear, learn from me how these three deities, on reaching a person, each become threefold.”
व्याख्या
समास यहाँ व्याकरण का समास मात्र नहीं, तत्त्वों का मेल है। अपरिचित दिखाई देने वाला भी इस मेल से समझा जाता है। आगे का शरीर-विवरण इसी प्राचीन व्याख्यात्मक ढाँचे का विस्तार है।
Explanation
Samāsa here means a combination of elements, not merely a grammatical compound. Even an initially unrecognized appearance is explained as such a combination. The bodily account extends that ancient explanatory scheme.
संदर्भ
बाह्य रंगों के बाद तीन तत्त्वों का शरीर में प्रवेश समझाया जाएगा।
Context
After external colors, the discussion turns to the three elements within the body.