Passage 101.2
यदादित्यस्य रोहितँरूपं तेजसस्तद्रूपं यच्छुक्लं तदपां यत्कृष्णं तदन्नस्यापागादादित्यादादित्यत्वं वाचारम्भणं विकारो नामधेयं त्रीणि रूपाणीत्येव सत्यम् ॥ २ ॥
पदच्छेद
अन्वय
आदित्यस्य यत् रोहितम् रूपम् [अस्ति], तत् तेजसः रूपम् [अस्ति]; यत् शुक्लम् [रूपम् अस्ति], तत् अपाम् [रूपम् अस्ति]; यत् कृष्णम् [रूपम् अस्ति], तत् अन्नस्य [रूपम् अस्ति] । आदित्यात् आदित्यत्वम् अपागात् । विकारः वाचारम्भणम् नामधेयम् [अस्ति]; त्रीणि रूपाणि इति एव सत्यम् [अस्ति] ।
हिन्दी अर्थ
“आदित्य का जो लाल रूप है, वह तेज का रूप है; जो सफेद है, वह जल का; जो काला है, वह अन्न का। आदित्य का अपना अलग आदित्यत्व जाता रहा। विकार वाणी पर आश्रित केवल एक नाम है; ये तीन रूप ही वास्तविक आधार हैं।”
English meaning
“The red appearance of the sun is the form of heat; its white appearance is the form of water; its black appearance is the form of food. The separate character of the sun as such has fallen away. A modification is a name dependent on speech; the three forms alone are the underlying reality.”
व्याख्या
लाल, सफेद और काले को क्रमशः तेज, जल और अन्न का रूप कहा गया है। अलग नाम से पहचानी वस्तु को इन आधारों में विश्लेषित किया जाता है; यह ऐतिहासिक तत्त्व-विचार है, आधुनिक वर्णक्रम या रासायनिक संघटन का दावा नहीं।
Explanation
Red, white, and black are assigned respectively to heat, water, and food. The separately named object is analyzed into these bases. This is the text’s ancient elemental account, not a claim about modern spectral analysis or chemical composition.
संदर्भ
त्रिवृत्करण को आदित्य के तीन रंगों में पहचाना जाता है।
Context
Threefold combination is identified through three colors in the sun.