Passage 101.6
यदु रोहितमिवाभूदिति तेजसस्तद्रूपमिति तद्विदाञ्चक्रुर्यदु शुक्लमिवाभूदित्यपाँरूपमिति तद्विदाञ्चक्रुर्यदु कृष्णमिवाभूदित्यन्नस्य रूपमिति तद्विदाञ्चक्रुः ॥ ६ ॥
पदच्छेद
अन्वय
यत् उ रोहितम् इव अभूत् इति [गृहीतम्], तत् तेजसः रूपम् इति तत् [ते] विदाञ्चक्रुः । यत् उ शुक्लम् इव अभूत् इति [गृहीतम्], [तत्] अपाम् रूपम् इति तत् [ते] विदाञ्चक्रुः । यत् उ कृष्णम् इव अभूत् इति [गृहीतम्], [तत्] अन्नस्य रूपम् इति तत् [ते] विदाञ्चक्रुः ।
हिन्दी अर्थ
“जो कुछ लाल-सा था, उसे उन्होंने ‘यह तेज का रूप है’ जान लिया। जो कुछ सफेद-सा था, उसे ‘यह जल का रूप है’ जान लिया। जो कुछ काला-सा था, उसे ‘यह अन्न का रूप है’ जान लिया।”
English meaning
“Whatever appeared reddish, they understood as a form of heat. Whatever appeared whitish, they understood as a form of water. Whatever appeared blackish, they understood as a form of food.”
व्याख्या
इव हर रंग को “सा” का अवकाश देता है। पहचान की तीन क्रियाएँ और उनके तीन निष्कर्ष अलग-अलग रखे गए हैं। इससे पूर्ववर्ती अग्नि आदि के उदाहरण व्यापक नियम बनते हैं।
Explanation
Iva allows “-ish” or “as if” for each color. The three acts of recognition and their three conclusions remain distinct. The earlier examples of fire and other lights are thus extended into a general rule.
संदर्भ
विद्वानों के सामान्य कथन को रंग-आधारित पहचान में खोला जाता है।
Context
The scholars’ general claim is unpacked as identification through colors.