Passage 60.3
स ह हारिद्रुमतं गौतममेत्योवाच ब्रह्मचर्यं भगवति वत्स्याम्युपेयां भगवन्तमिति ॥ ३ ॥
पदच्छेद
अन्वय
सः ह हारिद्रुमतम् गौतमम् एत्य उवाच—भगवति [त्वयि अहम्] ब्रह्मचर्यम् वत्स्यामि; भगवन्तम् उपेयाम् इति ।
हिन्दी अर्थ
वह हारिद्रुमत गौतम के पास गया और बोला: “भगवन्, मैं आपके यहाँ ब्रह्मचारी बनकर रहना चाहता हूँ। क्या मैं आपके पास शिष्य के रूप में आ सकता हूँ?”
English meaning
He went to Gautama Hāridrumata and said, “Sir, I wish to live with you as a student. May I approach you as a pupil?”
व्याख्या
उपेयाम् विनम्र इच्छा और अनुमति का भाव व्यक्त करता है। यहाँ कथा किसी पूर्ण ज्ञान की तत्काल प्राप्ति के बजाय गुरु-शिष्य सम्बन्ध की शुरुआत बताती है।
Explanation
Up eyām expresses a respectful wish to approach and be accepted. The event begins a teacher-student relationship rather than depicting instant completion of knowledge.
संदर्भ
माता की बात सुनकर सत्यकाम शिक्षक के पास औपचारिक स्वीकृति माँगता है।
Context
After speaking with his mother, Satyakāma approaches the teacher for acceptance.