Passage 53.3
अथ यानि चतुश्चत्वारिꣳशद्वर्षाणि तन्माध्यंदिनꣳसवनं चतुश्चत्वारिꣳशदक्षरा त्रिष्टुप्त्रैष्टुभं माध्यन्दिनꣳसवनं तदस्य रुद्रा अन्वायत्ताः प्राणा वाव रुद्रा एते हीदꣳसर्वꣳरोदयन्ति ॥ ३ ॥
पदच्छेद
अन्वय
अथ यानि चतुश्चत्वारिंशद्वर्षाणि [सन्ति], तत् माध्यंदिनम् सवनम् [अस्ति] । त्रिष्टुप् चतुश्चत्वारिंशदक्षरा [अस्ति]; माध्यन्दिनम् सवनम् त्रैष्टुभम् [अस्ति] । अस्य तत् रुद्राः अन्वायत्ताः [सन्ति] । प्राणाः वाव रुद्राः [सन्ति]; हि एते इदम् सर्वम् रोदयन्ति ।
हिन्दी अर्थ
फिर उसके जीवन के जो अगले चवालीस वर्ष हैं, वे उसका माध्यन्दिन सवन हैं। त्रिष्टुप् चवालीस अक्षरों वाली है और माध्यन्दिन सवन त्रिष्टुप् से सम्बद्ध है। उसके इस सवन से रुद्र जुड़े हैं। प्राण ही रुद्र हैं, क्योंकि वे ही इस समस्त जगत् को रुलाते हैं।
English meaning
The next forty-four years of life are the midday pressing. Triṣṭubh has forty-four syllables, and the midday pressing belongs to Triṣṭubh. The Rudras are associated with this pressing. The vital powers are the Rudras, for they make all this weep.
व्याख्या
वर्षों की संख्या छन्द के अक्षरों से मिलायी गयी है। तीनों चरण 24 + 44 + 48 = 116 वर्ष का आदर्श जीवन बनाते हैं। रुद्र और रुलाते हैं का सम्बन्ध वैदिक शब्दार्थ-ध्यान है, आधुनिक वैज्ञानिक व्युत्पत्ति या जीवनावधि की गारंटी नहीं।
Explanation
The years correspond to the meter’s syllable count. The three stages form an ideal life of 24 + 44 + 48 = 116 years. The relationship between Rudras and the stated action is a Vedic verbal contemplation, not a modern scientific etymology or guaranteed lifespan.
संदर्भ
जीवन-यज्ञ का दूसरा चरण चवालीस वर्षों, त्रिष्टुप् छन्द और रुद्र देवताओं को जोड़ता है।
Context
The second stage of the life-sacrifice joins forty-four years with the Triṣṭubh meter and the Rudras.