Passage 35.3
सर्वे स्वरा इन्द्रस्यात्मानः सर्व ऊष्माणः प्रजापतेरात्मानः सर्वे स्पर्शा मृत्योरात्मानस्तं यदि स्वरेषूपालभेतेन्द्रꣳशरणं प्रपन्नोऽभूवं स त्वा प्रति वक्ष्यतीत्येनं ब्रूयात् ॥ ३ ॥
पदच्छेद
अन्वय
सर्वे स्वराः इन्द्रस्य आत्मानः [सन्ति]; सर्वे ऊष्माणः प्रजापतेः आत्मानः [सन्ति]; सर्वे स्पर्शाः मृत्योः आत्मानः [सन्ति] । यदि तम् स्वरेषु उपालभेत, इन्द्रम् शरणम् प्रपन्नः अभूवम्; सः त्वा प्रति वक्ष्यति इति एनम् ब्रूयात् ।
हिन्दी अर्थ
सभी स्वर इन्द्र के रूप हैं, सभी ऊष्म-वर्ण प्रजापति के रूप हैं और सभी स्पर्श-वर्ण मृत्यु के रूप हैं। यदि कोई उसके स्वरों में दोष निकाले, तो वह कहे, “मैं इन्द्र की शरण गया हूँ; वही तुम्हें उत्तर देगा।”
English meaning
All vowels are forms of Indra, all breath-friction sounds forms of Prajāpati, and all stop consonants forms of Death. If someone criticises his vowels, he should say, “I have taken refuge in Indra; he will answer you.”
व्याख्या
स्वर यहाँ अ, आ आदि vowel-वर्ण हैं, केवल गाने की ऊँचाई नहीं। ऊष्म और स्पर्श प्राचीन ध्वनि-वर्ग हैं; उनका देवताओं से सम्बन्ध उपासनात्मक है।
Explanation
Svara here means a vowel such as a or ā, not merely musical pitch. Ūṣman and sparśa are traditional phonetic classes, related to the deities through contemplation.
संदर्भ
यह खण्ड गायक के स्वर, मानसिक संकल्प और वर्णोच्चारण को देवताओं तथा यज्ञफल से जोड़ता है।
Context
This section connects the singer’s vocal style, inward intentions and articulation with deities and sacrificial results.