Passage 128.2
स यदि पितरं वा मातरं वा भ्रातरं वा स्वसारं वाचार्यं वा ब्राह्मणं वा किञ्चिद्भृशमिव प्रत्याह धिक्त्वास्त्वित्येवैनमाहुः पितृहा वै त्वमसि मातृहा वै त्वमसि भ्रातृहा वै त्वमसि स्वसृहा वै त्वमस्याचार्यहा वै त्वमसि ब्राह्मणहा वै त्वमसीति ॥ २ ॥
पदच्छेद
अन्वय
सः यदि पितरम् वा मातरम् वा भ्रातरम् वा स्वसारम् वा आचार्यम् वा ब्राह्मणम् वा किञ्चित् भृशम् इव प्रत्याह, [तदा] एनम्, त्वा धिक् अस्तु इति एव आहुः; त्वम् पितृहा वै असि, त्वम् मातृहा वै असि, त्वम् भ्रातृहा वै असि, त्वम् स्वसृहा वै असि, त्वम् आचार्यहा वै असि, त्वम् ब्राह्मणहा वै असि इति [आहुः] ।
हिन्दी अर्थ
“यदि कोई पिता, माता, भाई, बहन, आचार्य या ब्राह्मण से कुछ बहुत कठोर बात कह दे, तो लोग उससे कहते हैं, ‘तुम्हें धिक्कार है! तुम पितृहन्ता हो, मातृहन्ता हो, भ्रातृहन्ता हो, बहन के हन्ता हो, आचार्यहन्ता हो, ब्राह्मणहन्ता हो।’”
English meaning
“If someone speaks very harshly to a father, mother, brother, sister, teacher or brahmin, people say to that person, ‘Shame on you! You are a father-killer, a mother-killer, a brother-killer, a sister-killer, a teacher-killer, a brahmin-killer.’”
व्याख्या
हन्ता वाले शब्द यहाँ कठोर तिरस्कार के रूप में कहे जाते हैं; वाक्य यह नहीं कहता कि कठोर बोलना और वास्तविक हत्या हर दृष्टि से एक अपराध हैं। अगला अनुच्छेद प्राण के निकल जाने पर व्यवहार का अन्तर दिखाता है।
Explanation
The “killer” terms function here as severe reproaches. The passage does not establish that harsh speech and actual killing are identical offenses in every respect. The next unit contrasts treatment after life has departed.
संदर्भ
जीवित सम्बन्धियों और शिक्षकों के अपमान पर होने वाली तीखी सामाजिक प्रतिक्रिया उदाहरण बनती है।
Context
The illustration turns to the severe social reaction to insulting living relatives and teachers.